Engineer’s day 2020: इंजीनियरों को बनाना होगा विश्वकर्मा और भगीरथ -पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज

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Last Updated on September 15, 2020 by Shiv Nath Hari

  • इंजीनियर्स डे, अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस
  • ’’आईये नदियों के लिये भगीरथ और पर्यावरण के पैरोकार बने’’
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  • इंजीनियरों को बनाना होगा विश्वकर्मा और भगीरथ -पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज
Source- Shivnath Hari

ऋषिकेश, 15 सितम्बर आज भारत के महान इंजीनियर सर मोक्षगुंगडम विश्वेश्वरैया जी का जन्मदिवस है उन्ही की याद में इंजीनियर्स डे Engineer’s day 2020 मनाया जाता है। एक इंजीनियर के रूप में एम विश्वेश्वरैया जी ने बहुत से अद्भुत काम किये. उन्होंने सिन्धु नदी से पानी की सप्लाई सुक्कुर गाँव तक करवाई, साथ ही एक नई सिंचाई प्रणाली ‘ब्लाक सिस्टम’ को शुरू किया.

इन्होने बाँध में इस्पात के दरवाजे लगवाए, ताकि बाँध के पानी के प्रवाह को आसानी से रोका जा सके। साथ ही मैसूर में कृष्णराज सागर बांध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, उस समय भारत में वह सबसे बड़ा जलाशय था। ऐसे अनेक यादगार कार्य विश्वेश्वरैया जी ने किये।

एम विश्वेश्वरैया जी को आधुनिक भारत के विश्वकर्मा के रूप में जाना जाता है। उनका जन्म 15 सितंबर, 1861 में मैसूर में हुआ था। भारत सरकार ने वर्ष 1968 में उनकी जन्म तिथि को ‘अभियंता दिवस’ घोषित किया था।

डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया को सिंचाई डिजाइन के मास्टर के रूप में उन्होने अपनी उत्कृष्ट पहचान बनायी थी। उनकी सबसे उल्लेखनीय परियोजनाओं में से एक कृष्णा राजा सागर झील और बांध है, जो कर्नाटक में स्थित है। वर्ष 1955 में उनकी अभूतपूर्व तथा जनहितकारी उपलब्धियों के लिये उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया।

दुनियाभर में 15 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। लोकतंत्र का तात्पर्य समावेश, समान व्यवहार और समान भागीदारी। वास्तव में यह शांति, सतत् विकास और मानवाधिकारों के संरक्षण के लिये एक उत्कृष्ट पहल है।


पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि विविधता में एकता ही भारतीय लोकतंत्र की विशेषता है। आजादी के पश्चात भारत ने बहुत विकास किया लेकिन किसी भी परिपक्व लोकतंत्र की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि सामाजिक समरसता के धरातल पर कितना विकास हुआ। साथ ही गरीबी, निरक्षरता, सांप्रदायिकता, लैंगिक भेदभाव और जातिवाद को और किस प्रकार कम किया जा सकता है। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि भारत में व्याप्त भेदभावों को कम करने के लिये हम सभी को मिलकर कार्य करना होगा।


पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा, ’आज सभी ’’इंजीनियरों को भगीरथ बनने की जरूरत है’’। धरती पर भगीरथ पहले इंजीनियर थे जिन्होने भागीरथी गंगा को धरती पर लाया था। इसे भगीरथ का प्रयोग कहें या तपस्या जो भी हो वह इतनी विलक्षण थी की आज भी गंगा हमारे पास है और वह भारत की भाग्य विधाता भी है। अब हमें प्रयास करना है कि गंगा माँ धरती पर हमेशा बनी रहे।

ऐसा न हो कि सरस्वती एक नदी थी की तरह गंगा भी एक नदी थी का ऐतिहासिक रूप प्राप्त कर लें। ऐसा न सुनना पड़े और आने वाली पीढ़ियों को ऐसा न पढ़ना पड़े कि गंगा अतीत की गोद में समा गयी अतः हम सभी को अपनी सामर्थ्य, शिक्षा एवं योग्यता के अनुसार नदियों, पर्यावरण एवं जल के संरक्षण के लिये कार्य करना होगा। जब देश की नदियों के पुनरूद्धार होगा तभी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रह सकता है।

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