Sawan Somvar 2020: उत्तराखंड के अलावा ब्रज क्षेत्र भरतपुर में भी स्थित है केदारनाथ

Last Updated on July 6, 2020 by Shiv Nath Hari

Sawan Somvar 2020: उत्तराखंड के अलावा ब्रज क्षेत्र भरतपुर में भी स्थित है केदारनाथ 

Sawan Somvar 2020: Apart from Uttarakhand, Kedarnath is also located in Braj region Bharatpur.
Sawan Somvar 2020:


Sawan Somvar 2020: उत्तराखंड में स्थित केदारनाथ के दर्शन व् पूजा और उनके प्रति अथाह श्रध्दा भक्ति तो सभी में है लेकिन इस केदारनाथ का एक भाग राजस्थान के भरतपुर में भी स्थित है जहाँ दूर दर्ज से लोग दर्शन करने आते है जहाँ करीब 50 फ़ीट से ज्यादा ऊंचाई पर पहाड़ी पर स्थित केदारनाथ विराजमान है जहाँ पहाड़ी की गुफा में शिवलिंग स्थित है और यह गुफा शेषनाग की आकृति का है जिसमे अंदर लोगों को लेटकर जाना पड़ता है जिसके बाद ही भगवान् केदारनाथ दर्शन होते है | 

केदारनाथ जिले के कामा उपखण्ड में स्थित है और यह क्षेत्र बृज क्षेत्र भी कहलाता है क्योंकि यहाँ भगवान् कृष्ण अपने बाल सखाओं के साथ क्रीड़ा करते थे और यहाँ अपनी गायों को चराने के लिए आते थे लेकिन मान्यता है की बुजुर्ग होने पर यसोदा माँ और नन्द बाबा ने भगवान् कृष्ण से कहा की लल्ला हमको सभी तीर्थों के दर्शन करा दे जिस पर भगवान् कृष्ण ने उनको कहा की आपको दर्शन करने के लिए सभी जगह जाने की जरुरत नहीं है बल्कि सभी तीर्थों का में यही कामा में ही आह्वान करता हूँ और कहा जाता है की भगवान कृष्ण ने सभी तीर्थों का आह्वान किया जिसके बाद सभी तीर्थ यहाँ आ गए और यसोदा माँ व् नन्द बाबा ने यही उनके दर्शन किये तभी से यहाँ केदारनाथ सहित सभी तीर्थ स्थित है हालाँकि उस समय तीर्थ पुष्कर नहीं आये थे क्योंकि वह तीर्थ राज थे इसलिए भगवान् कृष्ण ने यहाँ उनका स्वरुप विमल कुंड भी बनवाया था | 

कहा जाता है की तभी से यहाँ केदारनाथ विराजमान है और यहाँ भी दूर दर्ज से लोग केदारनाथ के दर्शन के लिए आते है और यहाँ के स्थानीय लोग उत्तराखंड नहीं जाकर यही केदारनाथ के दर्शन करते है | कामा उपखण्ड के गाँव बिलोंद के पास स्थित ऊँची पहाड़ी पर केदारनाथ विराजमान है जहाँ जाने के लिए पहाड़ी पर सीढ़ियां भी बनी हुई है और शिवलिंग पर पानी डालने के लिए लोगों को नीचे से पानी भरकर ले जाना पड़ता है | रोजाना हजारों की संख्या में श्रध्दालु यहाँ केदारनाथ के दर्शन करने के लिए पहुँचते है साथ ही पहाड़ी के नीचे भंडारा चलता है जहाँ लोग प्रसादी भी प्राप्त करते है | यहाँ स्थित केदारनाथ की जगह के विकास के लिए हालाँकि सरकार की तरफ से कोई पहल नहीं की गयी है जबकि प्राकृतिक दृष्टि से जैसे आदिकाल से ही जो स्थिति यहाँ थी वही स्थिति आज भी यहाँ देखने को मिलती है |  

  ब्रजराज,ब्रजराज और ब्रजवासियों की महिमा वेद पुराणों में गयी गयी है कामा 84 कोस परिक्रमा का भाग भी है और कामा का नाम उस समय काम्यवन,कदम्बवन था जिसे आदि वृंदावन भी कहा जाता था जो भगवान् कृष्ण की लीला स्थली थी | यहाँ भगवान् कृष्ण ने 16 हजार 108 ब्रजवालाओं को रक्षकों के चंगुल से बचाया है |