कोंकणा-भूमि की ‘डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे’ देखने की ये हैं पांच वजह.

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Last Updated on September 18, 2020 by Shiv Nath Hari

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कोंकणा-भूमि की ‘डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे’ देखने की ये हैं पांच वजह.

Here are five reasons to see the 'Dolly Kitty and those shining stars' of Konkona-land.
कोंकणा-भूमि की ‘डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे’ देखने की ये हैं पांच वजह.

कोरोनावायरस (Coronavirus) के कारण घरों में बंद लोगों का मनोरंजन का सहारा केवल ओटीटी प्लेटफॉर्म था, जहां पर ज्यादातर लोगों ने नई फिल्में और वेब सीरीज देखकर अपना समय बिताया. महामारी के कारण ज्यादातर फिल्मों ने डिजिटल रिलीज का विकल्प चुना और उनमें से एक है कोंकणा सेन शर्मा (Konkana Sen Sharma) और भूमि पेडनेकर (Bhumi Pednekar) की ‘डॉली किट्टी और वो चमकते सितार’ (Dolly Kitty Aur Woh Chamakte Sitare).

यह फिल्म आज नेटफ्लिक्स (Netflix) पर रिलीज हुई है. ‘डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे’ में दर्शकों को दो बहनों की कहानी देखने को मिलेगी, जो खुद की तलाश में निकलती हैं. इस तलाश के दौरान वो सोसायटी का घिनौना चेहरा देखती हैं और सारी बंदिशों को पार करके खुद को पाती हैं. यह फिल्म आपको क्यों देखने चाहिए इसके पांच कारण है. तो चलिए जानते हैं कि क्या हैं वो वजह?

फिल्म के कलाकार

किसी भी फिल्म के लिए जरूरी होते हैं उसमें अभिनय करने वाले कलाकार. एक अच्छा कलाकार भी अपने अभिनय से फिल्म को हिट करा सकता है. और यहां तो कोंकणा और भूमि के डेडली कॉम्बो के साथ मुख्य भूमिका में आमिर बशीर, विक्रांत मेसी, कुबर सैत और अमोल प्राशर जैसे मंझे हुए कलाकार हैं. सबसे पहली वजह तो फिल्म की कास्ट ही है जिसके चलते फिल्म को देखना तो बनता है.

आजादी की तलाश करती दो महिलाएं

इस फिल्म का निर्माण ‘लिपस्टिक अंडर माय बुरखा’ की डायरेक्टर अलंकृता श्रीवास्तव ने किया है. ‘लिपस्टिक अंडर माय बुरका’, चार महिलाओं की कहानी थी, जो कि अपने-अपने तरीके से अपनी आजादी की तलाश करती हैं. एक बहुत ही मजबूत विषय अलंकृता ने इस फिल्म में उठाया था और समाज का महिलाओं के प्रति का नजरिया है उसको दर्शाने की कोशिश की गई थी. ऐसा ही कुछ ‘डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे’ में भी देखने को मिलने की उम्मीद है, जहां अपनी आजादी के लिए निकलीं दो बहनो को समजा की घिनौनी सच्चाई से सामना करना पड़ता है.

बहनों का प्यार

यह फिल्म एक उस सिस्टरहुड को दर्शाती है, जिससे कोई भी रिलेट कर सकता है. जहां कोंकणा और भूमि एक दूसरे से अपने सीक्रेट शेयर करते हैं, लड़ती है और एक दूसरे से प्यार भी करती हैं. बिल्कुल वैसा ही जैसा हम अपनी बहनों के साथ फील करते हैं.

महिलाओं की यौन इच्छाएं

‘लिपस्टिक अंडर माय बुरखा’ की तरह यह फिल्म भी महिलाओं की यौन इच्छाओं के ईर्द-गिर्द दिखाई देती है. वैसे इस विषय को अभी भी देश में एक टैबू माना जाता है.

कोरोना से पहले के दिन

चूंकि यह फिल्म कोरोना महामारी से पहले के दिनों को दर्शाती है, तो यह उन अच्छे दिनों की याद दिलाएगी, जब आप बेफिकर होकर कहीं भी जाते थे, कुछ भी खाते थे और जो मन में आए वो करते थे.

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