Chanakya Niti In Hindi: मौत से भी ज्यादा खतरनाक है ये स्थिति, अपने भी छोड़ जाते हैं साथ

Last Updated on July 17, 2020 by Shiv Nath Hari

Chanakya Niti In Hindi: मौत से भी ज्यादा खतरनाक है ये स्थिति, अपने भी छोड़ जाते हैं साथ

Chanakya Niti In Hindi: आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों को नीति ग्रंथ कहे जाने वाले चाणक्य नीति की किताब में वर्णित किया है. इसमें वो एक श्लोक के माध्यम से उस चीज के बारे में बताते हैं जो मनुष्य के लिए मौत से भी ज्यादा कष्टदायी है. आइए जानते हैं चाणक्य की इस नीति के बारे में..

Chanakya Niti in Hindi: This situation is more dangerous than death, even you leave yourself
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Chanakya Niti In Hindi: अपने अपमान का बदला नंद वंश को गद्दी से बेदखल करवाकर लेने वाले आचार्य चाणक्य को कुशल अर्थशास्त्री और नीतियों का महान ज्ञाता माना गया है. नंद वंश के अहंकार को खत्म करने के लिए उन्होंने अपनी नीतियों से एक साधारण से बालक चंद्रगुप्त मौर्य को भारत का सम्राट बना डाला था. उनकी नीतियां मानव जीवन में काफी कारगर मानी जाती हैं. उन्होंने अपनी नीतियों को नीति ग्रंथ कही जाने वाली चाणक्य नीति में वर्णित किया है. इसमें वो एक श्लोक के माध्यम से उस चीज के बारे में बताते हैं जो मनुष्य के लिए मौत से भी ज्यादा कष्टदायी है. आइए जानते हैं इसके बारे में…

वरं प्राणपरित्यागो मानभङ्गन जीवनात्।

प्राणत्यागे क्षणां दुःख मानभङ्गे दिने दिने॥

चाणक्य ने अपमान को मृत्यु से भी अधिक पीड़ादायक और अहितकारी बताया है. वे कहते हैं कि अपमानित व्यक्ति के लिए जीवित रहने की अपेक्षा मर जाना अधिक उपयुक्त है.

चाणक्य कहते हैं कि अपमानित व्यक्ति दिन-प्रतिदिन अपमान का कड़वा घूंट पीता रहता है, समाज उसे घृणा की नजर से देखता है, रिश्तेदार और दोस्त भी उससे दूर भागने लगते हैं. ऐसे में अपमानित होकर जीने से अच्छा मरना है. मृत्यु तो बस एक क्षण का दुख देती है, लेकिन अपमान हर दिन जीवन में दुख लाता है.

लुब्धमर्थेन गृह्णीयात् स्तब्धमंजलिकर्मणा।

मूर्खं छन्दानुवृत्त्या च यथार्थत्वेन पण्डितम्।।

इस श्लोक में आचार्य चाणक्य लालची, घमंडी, मूर्ख और विद्वान को अपने वश में करने के तरीकों के बारे में बताते हैं. वो कहते हैं कि लालची मनुष्य को वश में करने के लिए उसे पैसा दे दीजिए, वो तुरंत आपके वश में हो जाएगा.

घमंडी व्यक्ति को सम्मान दे दीजिए वो आपके वश में हो जाएगा. अगर मूर्ख से पाला पड़ जाए तो उसे उसी के अंदाज में बात और व्यवहार करके अपने वश में कर सकते हैं. इन सबसे अलग अगर विद्वान को वश में करना है तो उसके सामने हमेशा सच बोलिए, वो आपके वश में खुद ही चला आएगा.

Chanakya Niti: गुस्से में बोलने से पहले करें ये काम, नहीं बिगड़ेगी बात

Chanakya Niti, Poison and sweetness in words: कहा जाता है कि एक व्यक्ति को सोच समझकर बोलना चाहिए. कब, क्या और कैसे बोलना है इसकी समझ होना जरूरी है, क्योंकि फिर बोले गए शब्द वापस नहीं लिए जा सकते हैं. चाणक्य के कहने का तात्पर्य है कि इंसान के पास बोली एक हथियार के मानिंद है जिसकी मदद से किसी के मन में अपने लिए सम्मान पैदा कराया जा सकता है, लेकिन उसी बोली से किसी की नजरों में गिरा भी जा सकता है.

आचार्य चाणक्य ने इंसान के जीवन को सफल और खुशहाल बनाने को लेकर अपने नीति शास्त्र में कई नीतियां बताई हैं. अपने नीति ग्रंथ में जहां उन्होंने इंसान की बोली को अमृत बताया है, तो वहीं उसे विष भी कहा है. वे कहते हैं कि किसी व्यक्ति की बोली बहुत मीठी भी होती है और जहर से भी भरे होते हैं. अब यह व्यक्ति को तय करना है कि उसे अपनी बोली में विष से भरे शब्द उगलने हैं या फिर चीनी से भी ज्यादा मीठा बोल रखना है.

कहा जाता है कि एक व्यक्ति को सोच समझकर बोलना चाहिए. कब, क्या और कैसे बोलना है इसकी समझ होना जरूरी है, क्योंकि फिर बोले गए शब्द वापस नहीं लिए जा सकते हैं. चाणक्य के कहने का तात्पर्य है कि इंसान के पास बोली एक हथियार के मानिंद है जिसकी मदद से किसी के मन में अपने लिए सम्मान पैदा कराया जा सकता है, लेकिन उसी बोली से किसी की नजरों में गिरा भी जा सकता है.

कई बार ऐसा होता है कि इंसान के जीवन में कई ऐसी परिस्थितियां आती हैं जब वे गुस्से में होते हैं. ऐसे में वे अपनी बोली में जहर भर लेते हैं और फिर विष भरे शब्द का इस्तेमाल करते हैं. जब इंसान गुस्से में हो तब उसे पता नहीं चलता या यूं कहें उसे अपने बोले गए जहरीले शब्द का तनिक भी एहसास नहीं होता कि वो क्या बोले जा रहा है. जब उसी व्यक्ति का गुस्सा शांत हो जाता है और वो अपने कहे गए शब्दों को याद करता है तो उसे पछतावा होने लगता है.

इसलिए कहा जाता है कि हमेशा बोलते समय अपनी वाणी पर कंट्रोल रखना चाहिए. बोलते समय यह जरूर ध्यान रखा जाना चाहिए कि वे क्या बोल रहे हैं और इसका अंजाम क्या होगा. अंजाम के बारे में पता होने पर व्यक्ति संभल सकता है. इसलिए अगर इंसान बोलने से पहले ये सोच ले तो फिर उसकी बोली से किसी सामने वाले व्यक्ति को चोट नहीं पहुंचेगी.

चाणक्य नीति: ऐसे दोस्तों पर न करें भरोसा, बढ़ा सकते हैं परेशानी

Chanakya Niti, Do not Trust Friends, Secret talks to Friends: किसी पर हद से ज्यादा भरोसा करना ठीक नहीं या अपनी कोई सिक्रेट बातें भी किसी को नहीं बतानी चाहिए. आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में बताया है कि दुष्ट दोस्तों से दूर रहना चाहिए…

किसी पर हद से ज्यादा भरोसा करना ठीक नहीं या अपनी कोई सिक्रेट बातें भी किसी को नहीं बतानी चाहिए. आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में बताया है कि दुष्ट दोस्तों से दूर रहना चाहिए, लेकिन अच्छे दोस्तों को भी अपनी छिपाकर रखी बातें शेयर नहीं करनी चाहिए. आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में दूसरे अध्याय के 5वें श्लोक में बताया है-

परोक्षे कार्यहन्तारं प्रत्यक्ष प्रियवादिनम्।

वर्जयेत्तादृशं मित्रं विषकुंभम् पयोमुखम्।।

इस श्लोक में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो भी साथी या मित्र हमारे मुंह पर मीठी-मीठी बातें करते हैं, वो हमारे पीछे में बुराई करते हैं. वो हमारे काम को बिगाड़ने की कोशिश करते हैं. उनसे दोस्ती नहीं रखनी चाहिए. उनके अलग हो जाने में ही भलाई है.

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि ऐसे दोस्त के मुख पर दूध दिखाई दता है, लेकिन इनके भीतर जहर भरा होता है. इनसे दोस्ती हमारे लिए हानिकारक होता है, इसलिए ऐसे लोगों से दोस्ती रखने से बचना चाहिए.

आगे आचार्य चाणक्य अपने नीति शास्त्र में दूसरे अध्याय के ही 6वें श्लोक में कहते हैं कि बुरे लोगों का भरोसा नहीं करना चाहिए.

न विश्वसेत् कुमित्रे च मित्रे चाऽपि न विश्वसेत्।

कदाचित् कुपितं मित्रं सर्वं गुह्यं प्रकाशयेत्।।

इस श्लोक में चाणक्य कहते हैं कि हमें कुमित्र पर विश्वास नहीं करना चाहिए. वे कहते हैं कि ध्यान रहे कि जो लोग हमारे दोस्त हैं उन पर भी बहुत ज्यादा विश्वास नहीं करना चाहिए. चाणक्य कहते हैं कि आगामी भविष्य में कभी उन दोस्तों से लड़ाई हो गई तो वे हमारी छिपी बातें सबके सामने उजागर कर सकते हैं. इससे हमारी समस्याएं बढ़ सकती हैं और फिर इससे नुकसान हमें ही होगा.