चम्बल के पानी को गम्भीर और वाणगंगा में लाओं – पंडित रामकिशन । हरीश पाठक की रिपोर्ट ।

Last Updated on September 26, 2022 by Swati Brijwasi

चम्बल के पानी को गम्भीर और वाणगंगा में लाओं – पंडित रामकिशन । हरीश पाठक की रिपोर्ट

भरतपुर 26 सितम्बर l वयोवृद्ध समाजवादी विचारक और भरतपुर के पूर्व सांसद पंडित राम किशन ने कहा कि सरकार को चंबल नदी का वो पानी जो बेकार बहकर समुद्र में जाता है उस पानी को सूखी पड़ी बाण गंगा नदी और गंभीर मैं लाकर सिंचाई का प्रबंध करना चाहिए ।
पूर्व सांसद पंडित रामकिशन के सहयोगी और किसान नेता इन्दल सिंह जाट के द्वारा जारी एक वयान में पंडित रामकिशन ने कहा कि इस वर्ष भी चम्बल से 19 हजार क्यूबिक मीटर पानी बहकर समुद्र में गया है जबकि हमें तो केवल चार हजार क्यूबिक मीटर पानी की ही जरूरत थी । पिछले कई वर्ष से यह पानी बहकर जा रहा है । उन्होने कहा कि हम वर्ष 2007 से यह माँग कर रहे है ।
उन्होंने कहा कि हमने सव से पहले यह मांग सरकार के समक्ष रखी थी कि इस पानी को भरतपुर में वाणगंगा और गम्भीर में लाकर डालों ताकी सिंचाई का प्रवंध हो सके । और मैं आज भी यही मांग कर रहा हू लेकिन उस वक्त तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने हमें यह कहा था कि हम 13 जिलों के लिए एक संयुक्त योजना बनाकर आपको भरतपुर में पानी देंगे लेकिन इस योजना को केंद्र सरकार जानबूझकर लेट कर रही है जिससे जनता का भारी नुकसान हो रहा है ऐसी स्थिति में राज्य सरकार को एक योजना बनाकर समुद्र में जाने वाले पानी को वानगंगा और गंभीर नदी में डालने की योजना बनानी चाहिए और इसके लिए हम जल्द ही राज्य के मुख्यमंत्री से मिलने की कोशिश करेंगे और इस मांग को पुनः उनके समक्ष रखेंगे ।
पूर्व सांसद पंडित रामकिशन ने कहा कि गत दिनों ईस्टर्न कैनल प्रोजेक्ट को बनाने वाली जल शक्ति मंत्रालय की कंपनी वापकोस की तरफ से भी यह बयान आ गया है कि इआरसीपी प्रोजेक्ट पूरी तरह नियमानुसार और सही बनाया गया है उसमें कोई भी तकनिकी कमी नहीं है ‘ इस सब के बावजूद भी केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित नहीं कर के राजस्थान के 13 जिलों की जनता का जानबूझकर नुकसान पहुंचा रहा है ।
किसान नेता इन्दल सिंह जाट ने कहा है कि जनता को इस पानी के लिये संगठित होकर संघर्ष करना चाहिये । यह पानी हमारा है और इस पर हमारा अधिकार है । हमारी सभी नदीया सूखी पड़ी है और खेती वगेर पानी के बर्बाद होती जा रही है ।

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