मारवाडी भाषा का विरोध-किसान नेता इंदल सिंह

Last Updated on September 18, 2020 by Shiv Nath Hari

v Marwadi language protest- farmer leader Indal Singh
किसान नेता इंदल सिंह

हलेना- किसान संघर्ष समिति के संयोजक और पूर्व जिला परिषद सदस्य इंदल सिंह जाट ने कहा कि अगर केंद्र सरकार द्वारा मारवाड़ी भाषा को राजस्थानी भाषा के नाम पर मंजूर किया गया या थोपा गया तो उसका डटकर विरोध किया जाएगा |

किसान नेता इंदल सिंह ने एक बयान जारी कर कहा कि प्रदेश में राजस्थानी नाम की कोई भाषा नहीं है, बल्कि वह मारवाड़ के कुछ क्षेत्र विशेष में यह महज एक बोली है, जो संपूर्ण प्रदेश में नहीं बोली जाती, जिसे राजस्थानी कहना प्रदेश के हिंदी बोलने वालों के साथ कुठाराघात है| उन्होंने कहा कि राजस्थान में अलग-अलग हिस्सों में ऐसी तो अनेक बोलियां बोली जाती हैं जैसे कि ब्रजभाषा, मेवाती, ढूंढाडी, हाडोती,जैसी अनेक क्षेत्रीय बोलियां हैं|

उन्होंने कहा कि मारवाड़ी भाषा को राजस्थानी के नाम पर अगर केंद्र सरकार ने संविधान की आठवीं अनुसूची में दर्ज किया तो उसका विरोध ही नहीं होगा बल्कि आगामी चुनावों में यह प्रमुख मुद्दा भी होगा| तथा इससे भाजपा को तगड़ा नुकसान भुगतना होगा, क्योंकि इस भाषा के लागू होने से हिंदी भाषी विद्यार्थियों का भविष्य बर्बाद हो जाएगा| हिंदी भाषी छात्र-छात्राएं तब तक इस कठिन मारवाड़ी भाषा को सीखेंगे तब तक अधिकांश सरकारी नौकरियां दूसरे लोगों के पास चली जाएंगी| इंदल सिंह ने कहा कि इस भाषा के थोपने के बाद राज्य में भाषाई आंदोलन पैदा होगा| और अलग-अलग हिस्सों की बोलियों को मानता देने की मांग जोर पकड़ लेगी|

केंद्र सरकार अगर मान्यता देती है तो यह उसके द्वारा किया गया सबसे बड़ा जनविरोधी फैसला साबित होगा| जो हिंदी भाषा वाले नौजवानों बच्चों में शारीरिक और मानसिक विकास को बुरी तरह प्रभावित करेगा| अगर सरकार यह फैसला लेती है तो फिर राज्य में अलग राज्य बनाने की मांग भी उठ सकती है|

उन्होंने कहा कि यह मारवाड़ क्षेत्र की लगभग 60 वर्ष पुरानी मांग है जिसे यूपीए-2 तक की सभी सरकारों ने कभी जायज नहीं माना और इसे मान्यता नहीं दी गई अब हमारे हिंदी भाषी जिलों के लोकसभा सदस्यों को भी इस खतरे को ध्यान में रखते हुए इसका कड़ा विरोध करना चाहिए| नहीं तो भाजपा के बाद इनको भी।जनता माफ नहीं करेगी| कोरोना संक्रमण के वक्त केंद्र सरकार को ऐसे निर्णय लेने से बचना चाहिए क्योंकि इससे जन आंदोलन भी हो सकता है जो कोरोना के हिसाब से उचित नहीं होगा|

समीपवर्ती ग्राम रामनगर निवासी नवयुग मंडल के अध्यक्ष मोनू शर्मा, खूबीराम मीणा, रामरतन, हुकम सिंह मीणा, भजनलाल,एवं सेवानिवृत्त अध्यापक दामोदर लाल, एवं सियाराम शर्मा,ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि राजस्थानी भाषा को किसी भी सूरत में संविधान की आठवीं अनुसूची में नहीं जोड़ा जाए, यह बहुत गलत साबित होगा इससे हिंदी बोलने वाले लोगों का बड़ा नुकसान होगा| अगर सरकार ने इस मारवाड़ी भाषा को जबरजस्ती थोपने की कोशिश की तो विरोध किया जाएगा|