विश्व फोटोग्राफी दिवस: फोटोग्राफी ध्यान भटकाने के लिये नहीं बल्कि ध्यान लगाने के लिये-स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज

Last Updated on August 19, 2020 by Shiv Nath Hari

  • विश्व मानवतावादी दिवस
  • भारत को विकास का ऐसा माॅडल चाहिये जो हर व्यक्ति को गरिमापूर्ण जीवन दे सके
  • विश्व फोटोग्राफी दिवस
  • फोटोग्राफी ध्यान भटकाने के लिये नहीं बल्कि ध्यान लगाने के लिये-स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज
World Photography Day: Photography not for distracting attention but for meditation - Swami Chidanand Saraswati Maharaj
विश्व फोटोग्राफी दिवस: फोटोग्राफी ध्यान भटकाने के लिये नहीं बल्कि ध्यान लगाने के लिये-स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज

ऋषिकेश, 19 अगस्त। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने विश्व मानवतावादी दिवस के अवसर पर प्रकृति, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति मानवतावादी दृष्टिकोण अपनाने का संदेश देते हुये कहा कि अगर प्रकृति, मनुष्य के प्रति मानवीय नहीं होेती तो दुनिया का नजारा कुछ और होता। उन्होंने कहा कि हमें अपने प्राकृतिक संसाधन और विशेष तौर पर हमारी जल राशियां, प्राणवायु ऑक्सीजन देने वाले पेड़-पौधें, पोषण और संरक्षण देने वाली पृथ्वी के प्रति मानवीय आचरण करना ही होगा। अब तो ऐसा समय आ गया है कि जिस प्रकार बच्चे पैसों को अपने गुल्लक में सम्भाल कर रखते हैं वैसे ही जल को सम्भालना होगा अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब पानी हमसे दूर हो जायेगा। हम पानी बना तो नहीं सकते कम से कम बचा तो सकते है।

आज विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि आज का दिन उन लोगों के लिये समर्पित है जिन्होंने खास और खूबसूरत दृश्यों को तस्वीरों में कैद कर उसे हमेशा के लिये यादगार बना दिया। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुये कहा कि फोटोग्राफी अर्थात सुनहरी यादों में जीना इसलिये फोटोग्राफी करें परन्तु ध्यान भटकाने के लिये नहीं बल्कि ध्यान लगाने के लिये करें। फोटोग्राफी उत्साह, उमंग भरने वाली हो इसमें भारतीय संस्कृृति के दर्शन हो।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि विगत कुछ महीनों से पूरा विश्व एक अदृश्य वायरस के कारण अनेक समस्याओं का सामना कर रहा है। इस कोरोना वायरस के कारण अनेक लोगों को अपनी जान भी गवांनी पड़ी साथ ही वैश्विक अर्थव्यवस्था भी लड़खड़ायी हुई है, ऐसे में हमने अनेक लोगों से सुना कि जान है तो जहान है परन्तु अब तो मुझे तो लगने लगा है जहान है तो जान है अर्थात प्रकृति है तो जीवन है, बिना प्रकृति और पर्यावरण के जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। भारत तो प्राकृतिक संसाधनों एवं मानवीय गुणों से समृद्ध राष्ट्र है उसके इन गुणों को जीवंत बनायें रखना हम सभी का परम कर्तव्य है।

विश्व मानवतावादी दिवस के अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि आज भारत सहित विश्व की एक बड़ी आबादी गरीबी में जीवन यापन कर रही है। हमारे पास विकास के कई मॉडल हैं, फिर भी हमारे देश की बड़ी आबादी अनेक अभावों के साथ जीवन जी रही है, इसलिये हमें विकास के ऐसे मॉडल की जरूरत है जो प्रकृति के अनुरूप हो। उन्होंने कहा कि अपने राष्ट्र को आत्मनिर्भर बनाने के लिये हमें विकास का एक ऐसा माॅडल चाहिये जो व्यक्ति एवं समाज की आवश्यकता को संतुलित करते हुए प्रत्येक मनुष्य को गरिमापूर्ण जीवन दे सके, सभी की पहुंच मौलिक सुविधाओं तक हो और इसके लिये हमें प्राकृतिक संसाधनों के संधारणीय उपभोग पर ध्यान देना होगा।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को गरिमापूर्ण जीवन देने, समाज के हर वर्ग और प्रत्येक व्यक्ति के जीवन स्तर में सुधार करने हेतु भारतीय सनातन दर्शन अर्थात ग्रीड कल्चर नहीं नीड कल्चर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है और इससे कल्याणकारी राज्य की संकल्पना भी पूरी हो सकती है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी एक मानवतावादी चिंतक थे, उनके अनुसार मनुष्य का जीवन ही एक धर्म है। धर्म न तो केवल पुस्तकों में है, न ही धार्मिक सिद्धांतों में, प्रत्येक व्यक्ति अपने ईश्वर का अनुभव स्वयं कर सकता है।

स्वामी विवेकानंद जी के शब्दों में “मेरा ईश्वर दुखी, पीड़ित और हर जाति का निर्धन मनुष्य है।” इस प्रकार उन्होंने गरीबी को ईश्वर से जोडकर दरिद्रनारायण की अवधारणा दी ताकि इससे लोगों को वंचित वर्गों की सेवा के प्रति जागरूक किया जा सके ताकि गरीबों की स्थिति में सुधार हो सके अतः हम सभी को मिलकर गरीबी और अज्ञानता की समाप्ति तथा गरीबों के कल्याण हेतु कार्य करना होगा यही तो राष्ट्र सेवा भी है।

प्रतिवर्ष 19 अगस्त को दुनियाभर में विश्व मानवतावादी दिवस या विश्व मानवता दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन उन लोगों की स्मृति में मनाया जाता है जिन्होंने मानवीय उद्देश्यों की पूर्ति के लिये तथा दूसरों की सहायता हेतु अपने प्राणों की बाजी लगा दी थी। वर्ष 2003 में इराक की राजधानी बगदाद में 16 अगस्त को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय पर हमला किया गया था, जिसमें 22 संयुक्त राष्ट्र कर्मी मारे गए थे। इसके बाद दिसंबर 2008 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 63वें सत्र में 19 अगस्त को विश्व मानवतावादी दिवस के रूप में नामित करने का निर्णय लिया गया था। यह दिन दुनियाभर में मानवीय जरूरतों की ओर ध्यान आकर्षित करने हेतु मनाया जाता है।