Shardiya Navratri 2020: माता कात्यायनी प्रतिशोध की नहीं बल्कि शोध की देवी

Last Updated on October 22, 2020 by Shiv Nath Hari

Shardiya Navratri 2020: माता कात्यायनी प्रतिशोध की नहीं बल्कि शोध की देवी

  • जीवन में प्रतिशोध नहीं बल्कि शोध हो-पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज
Shardiya Navratri 2020: Goddess Katyayani not of vengeance but the goddess of research
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज

Shardiya Navratri 2020: ऋषिकेश, 22 अक्टूबर। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने आज नवरात्रि के छटवें दिन अपने प्रातःकालीन उद्बोधन में माता कात्यायनी देवी के स्वरूप का वर्णन करते हुये कहा कि नवरात्रि के छटवें दिन साधकों ने अपनी साधना के दौरान आज्ञा चक्र पर ध्यान लगाते हुये़ स्थिर मन से माँ कात्यायनी देवी के स्वरूप का ध्यान किया।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि नवरात्रि के छटवें दिन माता कात्यायनी देवी की पूजा की जाती है। उस दिन साधक का मन आज्ञा चक्र में स्थित हो कर निष्ठापूर्वक ध्यान करे। योगसाधना में इस आज्ञा चक्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। माँ कात्यायनी की उपासना से भक्तों में आरोग्य की वृद्धि होती है। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि माता कात्यायनी प्रतिशोध की नहीं बल्कि शोध की देवी है। उनका ध्यान करते हुये जीवन को प्रतिशोध की ओर नहीं बल्कि शोध की ओर लेकर जायें अर्थात जीवन में प्रतिशोध नहीं बल्कि शोध हो। शोध यात्रा ही सिद्धि और शुद्ध की यात्रा है।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि नवरात्रि पर्व में हम कन्यापूजन करते हैं, इस भाव को हमेशा संकल्प की तरह याद रखें कि कन्या पूजन के साथ कन्याओं को; बेटियों को शिक्षा, सम्मान और संरक्षण भी प्रदान करें। उन्होने कहा कि बेटियों की शादी से पहले उन्हें शिक्षित किया जाये, जितना धन शादी में दहेज देने के लिये एकत्र करते हैं उसे बेटी की शिक्षा में लगाया जाये तो वह आत्मनिर्भर बनेगी और एक शिक्षित माँ अपने बच्चों को और आगे आने वाली पीढ़ियों को बेहतर भविष्य दे सकती है।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि बेटियां किसी पर बोझ नहीं हैं न ही अभिशाप हैं बल्कि बेटिया तो वरदान हैं। बेटियों को सशक्त बनाने के लिये और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिये शिक्षा जरूरी है। अक्सर देखने में आता है कि कई लोग लिंग परिक्षण करवा बेटियों की गर्भ में ही हत्या कर देते हैं और अनेक स्थानों पर बेटियों को जन्म के साथ ही लिंग आधारित असमानताओं का सामना भी करना पड़ता है, जिससे उनकी गरिमा को ठेस पहुंचती है और वे अपने आत्मविश्वास को खोने लगती हैं इसलिये लैंगिक समानता हेतु सकारात्मक सामाजिक बदलाव जरूरी है।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि नवरात्रि के नौ दिनों में प्रत्येेेेक दिन एक नया संकल्प लें और जीवन में आगे बढ़े।