17 अक्टूबर से शुरू हो रहा नवरात्रि, ऐसे करें घट स्थापना, जानें शुभ मुहूर्त और विधि

Last Updated on October 4, 2020 by Shiv Nath Hari

हिन्दू पंचांग के अनुसार अक्टूबर का महीना काफी खास है। हर साल की तरह इस साल भी इसी महीने माता रानी अपने भक्तों से मिलने और उनका कल्याण करने आ रही हैं। धर्म कर्म के लिहाज से यह महीना काफी ख़ास होता है। हर तरफ पंडाल सजते हैं। मंदिरों में मां की चौकी रखी जाती है। पूरे नौ दिन वातावरण में भक्ति और आस्था का समावेश नजर आता है। हर ओर माता की जयकारे की आवाज सुनाई देती है।

 Navratri starting from October 17, how to establish this, learn auspicious time and method
Navratri starting from October 17, how to establish this, learn auspicious time and method

माता के भक्त उनकी आस्था में डुबकी लगाते रहते हैं। इस साल शारदीय नवरात्रि 17 अक्टूबर से शुरू हो रहा है। नवरात्रि में पूरे नौ दिन तक माता की पूजा होती है। कहा जाता है की इन नौ दिनों में मां की विधि विधान से पूजा करने से मां अपने भक्त की सारी मुरादें पूरी करती हैं।

भक्त इन दिनों में माता की चौकी रख कर उनकी आराधना करते हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना की जाती है। इसका भी शुभ मुहूर्त निर्धारित होता है। इसी मूहूर्त में घट स्थापना की जाती है। घट स्थापना का शुभ मुहूर्त 17 अक्टूबर 2020 को सुबह 06:23:22 से 10:11:54 तक रहेगा। यानी घटस्थापना की अवधि 3 घंटे 48 मिनट तक की होगी।

घट स्थापना को ही कलश स्थापना या माता की चौकी भी कहते हैं। नवरात्रि में कलश स्थापना का विशेष महत्त्व है। हालांकि किसी भी पूजा में कलश की स्थापना जरुर की जाती है।माना जाता है कि कलश स्थापना में पूजा सफल होती है और भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

कैसे करें घट स्थापना

सबसे पहले आप खुद नहा धो कर स्वच्छ कपड़े पहन ले, उसके बाद पूजा घर की अच्छे से साफ सफाई कर लें, घर में पूजा की चौकी रख दें, उस पर लाल रंग का वस्त्र बिछादें ,अब चौकी पर नवग्रह बना लें, नवग्रह को आप हल्दी और चावल से बना सकते हैं, इसके बाद नवग्रह के पास मिटटी से भरा हुआ एक पात्र रख दें और उसमें जौ बो दें ,अब इस पात्र पर जल से भरा हुआ कलश रख दें,इसमें आम के पत्ते और फिर नरियल रख दें,

कलश की स्थापना के बाद चौकी पर मां की मूर्ति रखें दें। मां को फूलों की माला पहनाएं और फल चढ़ा दें। अब आप पूजा करने का संकल्प लें। मूर्ति के सामने एक घी का दीपक जला दें। अब आप पूजा शुरू करें और दूर्गा मां का पाठ करें। पूजा समाप्त होने के बाद मां की आरती करें। इसी प्रकार से शाम को भी आप पूजा करें। नौ दिन की पूजा के बाद नवरात्रि के आखिरी दिन आप कन्या पूजन करें और कन्याओं को भोजन करवाकर आप अपना भी व्रत खोल लें।

नवरात्रि में मां के इन नौ रूपों की पूजा होती है

शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी,चंद्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री