MP News: प्रदेश में कोराना नियंत्रण के बाद भी रहना चाहिए जागरूकता : मुख्यमंत्री श्री चौहान

Last Updated on April 23, 2020 by Shiv Nath Hari

प्रबुद्धजन के सुझावों पर होगा अमल : अन्य रोगों के उपचार की उपेक्षा न हो
 राज्य सलाहकार समिति के सदस्यों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में दिए महत्वपूर्ण सुझाव

MP News: Awareness should remain in the state even after Korana control: Chief Minister Shri Chouhan

MP News: भोपाल (अप्रैल 23, 2020) मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश में कोरोना पर नियंत्रण के लिए राज्य सरकार सभी जरूरी उपाय कर रही है। जनता को इस वायरस के संक्रमण से मुक्त कराने के लिए बहुआयामी कदम उठाए गए हैं। चिकित्सा क्षेत्र के साथ ही प्रमुख समाजसेवियों और सामाजिक नेताओं का सहयोग भी प्राप्त किया जा रहा है।  प्राप्त सुझावों के अनुसार जनता के हित में अन्य आवश्यक निर्णय भी लिये जाएंगे। श्री चौहान आज मध्यप्रदेश सरकार द्वारा कोरोना वायरस पर नियंत्रण के संबंध में गठित राज्य सलाहकार समिति के सदस्यों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चर्चा कर रहे थे। इस अवसर पर गृह तथा लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा उपस्थित थे।

प्रसिद्ध बाल अधिकार कार्यकर्ता, नोबेल पुरस्कार से सम्मानित और कोरोना समस्या के संबंध में राज्य सरकार की सलाहकार समिति के सदस्य श्री कैलाश सत्यार्थी ने सुझाव दिया कि मध्यप्रदेश में स्वैच्छिक संगठनों के माध्यम से जन-जागरूकता अभियान चलाना होगा। इससे कोरोना वायरस की समस्या के सामाजिक दुष्प्रभावों को रोकने में आसानी होगी। विशेष रूप से इन दिनों प्रचलन में आ रही चाईल्ड प्रोनोग्राफी पर अंकुश लगाने के लिए भी सख्त कदम उठाने होंगे। श्री सत्यार्थी ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग में अथर्ववेद संहिता के मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि आज की स्थितियों में परमात्मा से प्रार्थना की जा रही है कि सभी लोगों को ज्ञात और अज्ञात भय से मुक्ति मिले। सभी दिशाओं को भयमुक्त बनाते हुए लोक जागरण और लोक चेतना की आवश्यकता समझते हुए निरंतर कार्य की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश कुछ कार्यों में  नेतृत्व करने की स्थिति में है।

श्री सत्यार्थी ने कहा कि जब लॉक डाउन  की स्थिति समाप्त होगी, तो सरकार और समाज को मिलकर बच्चों के अधिकार की रक्षा के लिए सजग रहकर सक्रिय भूमिका निभानी होगी। यह हमारा सामाजिक दायित्व भी है।

श्री सत्यार्थी ने कहा कि लॉकडाउन के पश्चात जी-7 राष्ट्रों के राजदूत और यूरोपियन कमेटी की एक बैठक अगर भोपाल में होती है,  तो वे अपने संपर्कों से इसमें सहयोग करते हुए स्वयं भी शामिल होंगे। श्री सत्यार्थी ने मोबाइल आंगनवाड़ी और भोजन प्रदाय व्यवस्था को बेहतर बनाने के भी सुझाव दिए। उन्होंने प्रदेश में इस क्षेत्र में संसाधनों के विकास पर बल दिया।

श्री कैलाश सत्यार्थी ने मध्यप्रदेश में कोरोना वायरस नियंत्रण के लिए किए जा रहे अच्छे कार्यों के लिए मुख्यमंत्री श्री चौहान को बधाई दी। श्री सत्यार्थी ने कहा कि मुख्यमंत्री के संवेदनशील व्यक्तित्व से मध्यप्रदेश में इस रोग पर नियंत्रण का कार्य भली-भांति हो रहा है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने राज्य सलाहकार समिति के सदस्यों को जानकारी दी  कि प्रदेश में निर्धन तबके को तीन माह का राशन प्रदान किया गया है। श्रमिकों को एक हजार रुपये की राशि प्रदान करने के साथ ही मिड-डे मील की व्यवस्था और विद्यार्थियों के लिए स्कॉलरशिप की व्यवस्था की गई। सामाजिक सुरक्षा पेंशन के हितग्राहियों के खाते में 562 करोड़ रुपए की राशि भी जमा की गई। प्रदेश में कोरोना से संक्रमित लोगों के उपचार की समुचित व्यवस्था की गई है। बड़ी संख्या में रोगी ठीक होकर घर जा रहे हैं। इसके बावजूद निरंतर सावधानी बरतते हुए इस रोग के नियंत्रण के लिये पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी को भी प्रदेश की स्थिति से निरंतर अवगत करवाया गया है। श्री चौहान ने कहा कि समिति के विद्वान सदस्यों का व्यापक अनुभव है। उनके सुझाव पर क्रियान्वयन की आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। समय-समय पर समिति के सदस्यों से संवाद जारी रहेगा और राज्य सरकार द्वारा की गई कार्यवाही से उन्हें अवगत भी करवाया जाएगा। 

मुख्यमंत्री चौहान ने वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा नोबेल पुरस्कार से पुरस्कृत प्रख्यात समाजसेवी श्री कैलाश सत्यार्थी के अलावा प्रदेश की पूर्व मुख्य सचिव श्रीमती  निर्मला बुच, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी श्री सरबजीत सिंह, समाजसेवी श्री रामेंद्र सिंह, सेवा भारती से जुड़े श्री नवल किशोर शुक्ला , डॉ. जितेंद्र जामदार, डॉ. निशांत खरे, श्री मुकेश मौड़, डॉ. अभिजीत देशमुख, डॉ. राजेश सेठी, श्री एस.पी. दुबे और श्री मुकुल तिवारी से बात की।

सलाहकार समिति के सदस्यों के प्रमुख सुझाव

मुख्यमंत्री श्री चौहान को सलाहकार समिति के सदस्यों ने आज अनेक महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। विशेष रूप से लॉकडाउन समाप्त होने के बाद उत्पन्न परिस्थितियों से निपटने और वर्तमान में कोरोना के अलावा अन्य रोगों के उपचार के संबंध में भी सजग रहने के सुझाव इनमें शामिल हैं।

श्रीमती निर्मला बुच ने कहा कि कोरोना का भय लोगों के मन से दूर करना होगा। प्रदेश में अब तक तत्परता से अच्छा कार्य किया गया है। एक दीर्घ अवधि की योजना बनाकर आमजन को रोग नियंत्रण कार्य से जोड़ना होगा। श्रीमती बुच ने इसके लिए मुख्यमंत्री श्री चौहान को बधाई भी दी। श्रीमती बुच ने सुझाव दिया कि निर्धन वर्ग के लोगों को रोग परीक्षण करवाने की भी समझाइश देना आवश्यक है। यथासंभव टेस्ट के लिए उन्हें व्यक्तिगत स्तर पर आर्थिक सहयोग भी देना चाहिए। सोशल डिस्टेंटिंग का पालन निरंतर हो।

सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी श्री सरबजीत सिंह ने कोरोना से युद्ध में शहीद हुए पुलिस जवानों और चिकित्सकों आदि को नमन कर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि लॉक डाउन समाप्ति के बाद श्रमिकों के आने-जाने के कार्य में एक व्यवस्था जमानी होगी। इसके साथ ही इन स्थितियों का अपराधिक तत्व फायदा न उठायें, इसके प्रति सजग रहकर उन्हें नियंत्रित करने की कार्यवाही करनी होगी। उपभोक्ता वस्तुओं की व्यवस्थित आपूर्ति के लिए प्रयास करने होंगे।

श्री सिंह ने कहा कि शहरों के वो इलाके, जो कंटेनमेंट एरिया हैं, उन पर निरंतर ध्यान देना होगा। बचाव कार्य में लगे लोगों की सुरक्षा भी आवश्यक है। बेस्ट प्रैक्टिसेज को प्रोत्साहित करना होगा।

समाजसेवी श्री रामेंद्र सिंह ने कहा कि सागर, रीवा और जबलपुर संभागों के आदिवासी क्षेत्रों में उन्होंने सरकार से मिली सुविधाओं के लिए हितग्राहियों में अच्छी प्रतिक्रिया देखी है। इनके लिए रोजगार की योजना बनना चाहिए। बैगा, सहरिया और भारिया जनजाति के लोगों को प्राप्त राशि से उन्हें दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ा। श्री रामेंद्र सिंह ने सुझाव दिया कि अन्य स्थानों से आकर मजदूरी करने वाले लोगों को क्रमशः अन्य क्षेत्रों में भेजे जाने की व्यवस्था आवश्यक होगी। लॉक डाउन समाप्त होने के बाद कम वेतन प्राप्त करने वाले लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति को प्राथमिकता देनी होगी। समाज में तनाव और भय दूर हो, इसके लिए वार्ड स्तर पर समितियां बनाकर कार्य को अंजाम देना उचित रहेगा। इसके साथ ही, जो संगठन कार्य कर रहे हैं, उनसे भी कार्य विशेष की दृष्टि से संपर्क रखते हुए उन्हें दायित्व देने होंगे। बालक, बालिका गृहों में ज्यादा संख्या न रहे, इसकी व्यवस्था की जा सकती है। इसके अलावा, वृद्धाश्रम में रहने वालों की चिंता भी आवश्यक है। फसल उपार्जन के कार्य में बाधाएं न आएं, इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में निरंतर निगाह रखने की जरूरत है।

सेवा भारती के वरिष्ठ पदाधिकारी श्री नवल किशोर शुक्ला ने कहा आइसोलेशन सेंटर्स पर निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता है। इन सेंटर्स पर मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए मनोरंजन का साधन भी उपलब्ध करवाया जा सकता है। कारपेंटर और प्लम्बर की सेवाओं को प्राप्त करने के लिए उन्हें सामग्री की आपूर्ति करना आवश्यक है। श्री शुक्ला ने कहा कि राज्य सरकार के प्रयास सराहनीय है। उन्होंने कहा कि आप मुख्यमंत्री ना होते, तो राज्य में स्थिति विषम होती।

डॉ. जितेंद्र जामदार ने कहा कि प्रायवेट अस्पतालों में ट्रेनिंग और ट्रेनर का मॉडल उपलब्ध होना चाहिए। एक प्रशिक्षण ट्रेनर्स का होना चाहिए। सभी चिकित्सा महाविद्यालयों में पूर्व वर्षों में मुख्यमंत्री द्वारा की गई व्यवस्थाओं से आज उनका लाभ आमजन को मिल रहा है। डॉ. जामदार ने कहा कि फ्रंटलाइन वर्कर्स के लिए पीपीई किट की पर्याप्त व्यवस्था की जा रही है, जो सराहनीय है। उन्होंने जन अभियान परिषद की भूमिका और इसे सक्रिय बनाने की आवश्यकता बताई।

डॉ. दीपक शाह ने कहा कि मास्क और अन्य ऐसी सामग्री, जो वायरस संक्रमण के इस दौर में कचरे में फेंकी जाती है, उनके उचित निष्पादन की व्यवस्था बनी रहे, यह बहुत आवश्यक है। अस्पतालों में 24 घंटे सुविधा के लिए पास जारी किए जाना चाहिए। ऐसे छात्रावास, जहाँ भोजन की व्यवस्था नहीं है, वहाँ आवश्यक व्यवस्था करने की जरूरत है।

डॉ. निशांत खरे ने कहा निमाड़ क्षेत्र में मिर्ची और कपास उत्पादन के लिए किसानों को तैयारी करनी होगी। इसकी व्यवस्था करते हुए राज्य सरकार आवश्यक सहयोग दे। डॉ. खरे ने सकारात्मकता का भाव प्रोत्साहित करने और लोगों को मनोवैज्ञानिक समस्याओं से मुक्त रखने के लिए सरकार और समाज, दोनों के प्रयास आवश्यक बताए। सोशल पुलिस की व्यवस्था की जा सकती है।

श्री मुकेश मौड़ ने कहा कि होम क्वॉरेंटाइन की प्रैक्टिस को बढ़ाया जाना आवश्यक है। अस्पतालों की तुलना में यह कारगर व्यवस्था होगी। श्री मौड़ ने कहा कि व्यक्ति अनावश्यक मूवमेंट न करें और लोग परिवार के साथ रहें,इस संदेश  पर निरंतर फोकस प्रशंसनीय है।

डॉ. राजेश सेठी ने कहा कि नए हॉस्पिटल रिजर्व में रखे जाएं। रायसेन और होशंगाबाद में जिस तरह प्रकरण आए हैं, वहाँ नजर रखने की आवश्यकता है। इसके साथ ही, कोरोना वायरस की दिशा को समझने के लिए अस्पतालों की फ्लू ओपीडी की संख्या पर भी नजर रखी जाना चाहिए। बंद हुए प्रायवेट अस्पतालों को सेनेटाईज कर पुन: शुरू किया जा सकता है।

डॉ. अभिजीत देशमुख ने कहा कि मध्यप्रदेश में कोरोना वायरस पर नियंत्रण की स्थिति अच्छी है। रोकथाम के उपाय सतत लागू किए जाएँ। इंदौर में घर-घर किए गए सर्वेक्षण से रोग को रोकने में मदद मिली है।

डॉ. एस.पी. दुबे ने कहा कि मध्यप्रदेश में अधिक से अधिक टेस्टिंग और उनके सैंपल विमान द्वारा भेजने की व्यवस्था सराहनीय है। सैम्पिंलग कार्य में संलग्न स्टाफ का प्रशिक्षण भी होना चाहिए। मेडिकल कॉलेजों में माइक्रोबायोलॉजी विभाग की व्यवस्थाओं और नाक ,कान ,गला रोग के चिकित्सकों और विशेषज्ञों की सेवाएं निरंतर ली जाना चाहिए। धर्मगुरूओं द्वारा कोरोना के बारे में जागरूकता फैलाने की गतिविधियां होना चाहिए।

डॉ. मुकुल तिवारी ने कहा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन टेलीमेडिसिन को अपना चुका है और प्रदेश के लोग इसका लाभ प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने  रोग के लक्षण देखने पर जांच की व्यवस्थाओं को और पुख्ता बनाने की आवश्यकता बताई। इमरजेंसी पेशेंट की कोरोना टेस्टिंग की अनिवार्यता खत्म होना चाहिए।

मध्यप्रदेश में निरंतर पुख्ता होती व्यवस्थाएँ

अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य मो. सुलेमान ने बताया के मध्यप्रदेश में वर्तमान में 12 लैब प्रतिदिन लगभग 2000 सैंपल ले रही हैं। पूर्व में  सिर्फ 2 लैब ही कार्यरत थीं। शीघ्र ही  राज्य में 2500 सैंपल लेने की व्यवस्था कर ली जाएगी और मई में यह क्षमता 5000 सैंपल प्रतिदिन होगी। भारत सरकार और आईसीएमआर द्वारा पूर्ण सहयोग प्राप्त हो रहा है।

इंदौर और भोपाल में डीआरडीओ से अनुमोदित पीपीई किट तैयार हो रही हैं। प्रतिदिन 10,000 किट तैयार हो रही हैं। इंदौर में भी स्थिति में सुधार परिलक्षित हो रहा है। इंदौर नगर में 11 कटेंनमेंट एरिया बनाने से काफी सहयोग मिला है। हाई रिस्क व्यक्तियों के सैंपल लेने और संदिग्ध होने पर क्वॉरेंटाइन की कार्यवाही भी निरंतर की जा रही है।