गंगा के 2300 किलोमीटर से ज्यादा लंबे किनारे पर करोड़ों लोगों को जीवन मिलता है -अमित शाह

Last Updated on March 13, 2020 by Shiv Nath Hari

गंगा के 2300 किलोमीटर से ज्यादा लंबे किनारे पर करोड़ों लोगों को जीवन मिलता है -अमित शाह

  • प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने समग्र देशवासियों को नमामि गंगे अभियान से जोडा है –  श्री अमित शाह
  • नमामि गंगे की सफलता तभी पूरी होगी जब हम 15 साल से कम उम्र के बच्चों के मन में गंगा के प्रति श्रद्धा उत्पन्न करेंगे, संरक्षण और संवर्धन का संस्कार पैदा करेंगे – केंद्रीय गृह मंत्री
  • हजारों साल से गंगा न केवल भारत बल्कि दुनिया को बहुत कुछ देने वाली संस्कृति की परिचायक रही है  –  श्री अमित शाह
  • भारत के अध्यात्म, ज्ञान, संस्कृति और अर्थतंत्र में गंगा का विशेष महत्‍व है –  श्री अमित शाह
Union Home Minister Shri Amit Shah was present as the Chief Guest at the flag-in Ganga Invitation Campaign in New Delhi
Union Home Minister Shri Amit Shah was present as the Chief Guest at the flag-in Ganga Invitation Campaign in New Delhi

नई दिल्ली (13 मार्च) केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने आज यहां राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम  फ्लैग-इन गंगा आमंत्रण अभियान में बोलते हुए कहा कि गंगा को यदि नदी की दृष्टि से देखा जाए, इसके किनारे रहने वाले लोगों की आबादी की दृष्टि से देखा जाए तो इसका महत्‍व कम समझ में आएगा किंतु गंगा हजारों साल से न केवल भारत बल्कि दुनिया को बहुत कुछ देने वाली संस्कृति की परिचायक है। यही कारण है कि गंगा के प्रति बहुत अधिक श्रद्धा है, घर-घर में गंगाजल मिलता है।

यह श्रद्धा और विश्वास खड़े होने में बहुत वर्ष लगे हैं। श्री शाह का कहना था कि इसी गंगा से सभ्यता का निर्माण हुआ है जो अत्यंत प्राचीन होने के साथ-साथ समाज में सबसे ज्यादा योगदान देने वाली सभ्यता है। भाषा, विज्ञान, धार्मिक अनुसंधान या अध्यात्म की बात हो या संस्‍कार की बात हो, समग्र विश्व के अंदर भारतीय संस्कृति सबसे ज्यादा देने वाली संस्कृति रही है और इस संस्कृति का प्रतीक गंगा है। भारत का इतिहास गंगा के बिना संभव नहीं है l

श्री अमित शाह ने कहा कि गंगा का नाम लेते ही एक बड़ी जनसंख्या के मन में पूज्य भाव आता है, श्रद्धा आती है और एक विशेष प्रकार का लगाव उत्पन्न होता है। उन्‍होंने कहा कि गंगा के 2300 किलोमीटर से ज्यादा लंबे किनारे पर करोड़ों लोगों को जीवन मिलता है और गंगा नदी ने अपने किनारे हजारों गांवों, शहरों और महानगरों को जीवन दिया है। भारत के अध्यात्म, ज्ञान, संस्कृति और भारतीय अर्थतंत्र में गंगा का विशेष स्‍थान है।

उन्‍होंने कहा कि गंगा को सदैव मां की दृष्टि से देखा गया है और मां को सजाना, संवारना उसका संरक्षण करना हम सबका दायित्व है।

श्री अमित शाह ने कहा कि गंगा के बढ़ते प्रदूषण के कारण उसका आचमन करने में झिझक होने लगी थी, हजारों साल से यह मान्यता थी कि गंगा में डुबकी लगाने से सारे पाप दूर होते हैं परंतु गंगा का जल दूषित होने के कारण गंगा में डुबकी लगाने में भी झिझक होने लगी थी। 2014 में पूर्ण बहुमत की सरकार आने के बाद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने गंगा को स्वच्छ करने के उपाय किए।

यह केवल ढांचा खड़ा करने का प्रयास नहीं था, केवल प्रदूषण रोकने का अभियान नहीं था बल्कि नमामि गंगे का अभियान देश के अंदर संस्‍कार निर्मित करना और आने वाले हजारों सालों तक गंगा को कोई दूषित न करे, ऐसा प्रयास था। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने नमामि गंगे प्रोजेक्‍ट में  समग्र देशवासियों को शामिल किया है। श्री शाह ने कहा कि पहले भी कई बार गंगा की सफाई का अभियान शुरू किया गया किंतु सफल नहीं हुआ। उनका कहना था कि 5 साल के अंदर इतना बड़ा परिवर्तन होना एक सराहनीय प्रयास का परिणाम है। इस अभियान में कई सारे संत महात्मा, जानीमानी हस्तियाँ जुड़ीl

मोदी सरकार ने गंगा से सटे गावों में शौचालय बनाए, गंगा के किनारे वन बने । समयबद्ध तरीके से पानी छोड़ा जा रहा है l

श्री शाह ने बताया कि नमामि गंगे प्रोजेक्ट से गंगा के पानी की गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ है। गंगा की अविरलता और निर्मलता को कायम रखने के लिए आमजन को इस अभियान से जुड़ना आवश्यक है। गंगा आमंत्रण अभियान ने बड़ी संख्या में लोगों को जोड़ा और जागरूक किया है। इस अभियान ने आने वाली पीढ़ियों को संस्कार देने का काम किया है। श्री शाह ने यह भी कहा कि नमामि गंगे की सफलता तभी पूरी होगी जब हम 15 साल से कम उम्र के बच्चों के मन में गंगा के प्रति श्रद्धा उत्पन्न करेंगे, संरक्षण और संवर्धन का संस्कार पैदा करेंगे। उन्‍होंने बताया कि मोदी जी के नेतृत्व में जल शक्ति मंत्रालय द्वारा कई अभियान चलाए गए हैं।

श्री अमित शाह ने बताया कि वर्ष 1985 से 2014 तक 4 हजार करोड़ रुपए खर्च किए गए और 2014 के बाद 20000 खर्च कर गंगा को स्वच्छ बनाने का काम किया गया। उनका यह भी कहना था कि 116 प्रोजेक्ट आज पूरे हो चुके हैं तथा आने वाले समय में गंगा की सहायक नदियों को भी संरक्षित करने का प्रयास किया जाएगा। श्री शाह ने बताया कि 2020-21 के बजट में जल शक्ति मंत्रालय को 30700  करोड रुपए आवंटित किए गए हैं।

कार्यक्रम के दौरान जलशक्ति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत, जलशक्ति राज्य मंत्री श्री रतनलाल कटारिया तथा सचिव जल शक्ति मंत्रालय सहित बड़ी संख्या में केंद्र सरकार के अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित रहे।