Latest Rpsc news in hindi: आरपीएससी से सीधी भर्ती आते ही अजमेर में प्राध्यापकों की नियुक्ति-डॉ. सुभाष गर्ग

Last Updated on March 2, 2020 by Shiv Nath Hari

Latest Rpsc news in hindi:आरपीएससी से सीधी भर्ती आते ही अजमेर में प्राध्यापकों की नियुक्तिडॉ. सुभाष गर्ग    

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Latest Rpsc news in hindi: जयपुर, 2 मार्च। संस्कृत शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुभाष गर्ग ने सोमवार को विधानसभा में कहा कि राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा जब संस्कृत शिक्षा में सीधी भर्ती का परिणाम आ जाएगा तो अजमेर में प्राध्यापकों की नियुक्ति कर दी जाएगी।

डॉ. गर्ग प्रश्नकाल में विधायकों द्वारा इस संबंध में पूछे गये पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि राजकीय प्रवेशिका विद्यालय के पदों के लिए विभाग द्वारा 42 पदों तथा 58 पदाें सहित कुल 100 पदों की अभ्यर्थना राजस्थान लोक सेवा आयोग को भिजवाई जा चुकी है। उन्होंने बताया कि प्राध्यापक पद के लिए विभाग द्वारा 286 पदों की अभ्यर्थना भिजवाई गई, जिनमें से आरपीएससी द्वारा 268 पदों पर विज्ञापन जारी किया गया। बचे हुए पदों  के लिए विज्ञापन जारी किया जाना शेष है।


उन्होंने बताया कि वरिष्ठ अध्यापक के 718 पदों का परिणाम जारी किया गया। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा शारीरिक परीक्षण अंवेक्षक ग्रेड तृतीय के 7 पदों पर तथा पुस्तकालयाध्यक्ष ग्रेड तृतीय के 31 पदों पर राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड को अभ्यर्थना भेज दी गई है। उन्होंने बताया कि अध्यापक लेवल प्रथम के लिए रीट परीक्षा के उपरान्त विभागीय स्तर पर विज्ञापन दिया जाना प्रस्तावित है।
डॉ. गर्ग ने बताया कि प्रदेश में महाविद्यालयों में शिक्षकों को भरने के लिए पूर्ण कार्ययोजना बना ली गई है तथा 715 पदों पर काउंसलिंग प्रकिया जारी है। उन्होंने कहा कि सामान्य शिक्षा की भर्ती भी जब साथ- साथ होती है तो अधिकतर शिक्षक उस भर्ती में चले जाते है जिससे संस्कृत शिक्षा के पद खाली रह जाते है इसलिए अब शिक्षकों की सामान्य शिक्षा के भर्ती के बाद काउसलिंग की जाएगी। 


उन्होंने कहा कि सावर में एक प्राध्यापक कार्यरत है, आगामी सत्र में वहां पर संस्कृत शिक्षा में अन्य पदों की नियुक्ति कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2008, 2015 तथा 2018 में स्कूल शिक्षा के सेवा नियमों में बदलाव किए गए तथा 2015 से 2018 के नियमों में बदलाव के कारण 50 प्रतिशत पद सीधी भर्ती तथा 50 प्रतिशत पद डीपीसी के माध्यम से भरे जाते हैं। उन्होंने बताया कि जैसे ही आरपीएससी द्वारा सीधी भर्ती से पद प्राप्त हो जाते हैं, अजमेर जिले में संस्कृत शिक्षा के रिक्त पदों को भर दिया जाएगा।


डॉ. गर्ग ने इससे पहले विधायक श्री वासुदेव देवनानी के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में बताया कि संस्कृत शिक्षा विभाग में वर्ष 2018-19 में नये राजकीय विद्यालय एवं महाविद्यालय नहीं खोले गये। उन्होंने प्रदेश के राजकीय संस्कृत विद्यालयों एवं  महाविद्यालयों में स्वीकृत, कार्यरत एवं रिक्त पदों का संवर्गवार विवरण सदन के पटल पर रखा। उन्होंने जिला अजमेर के राजकीय संस्कृत महाविद्यालयों एवं विद्यालयों में विभिन्न संवर्गों के स्वीकृत, कार्यरत एवं रिक्त पदों का विवरण भी सदन के पटल पर रखा। 
उन्होंने बताया कि वर्ष 2019-20 में संस्कृत शिक्षा में एक राजकीय शास्त्री संस्कृत महाविद्यालय को आचार्य स्तर पर तथा 49 राजकीय प्रवेशिका विद्यालय को वरिष्ठ उपाध्याय स्तर, 10 उच्च प्राथमिक संस्कृत विद्यालय को प्रवेशिका स्तर पर एवं 6 प्राथमिक संस्कृत विद्यालयों को उच्च प्राथमिक स्तर पर क्रमोन्नत किया गया है तथा 5 नवीन राजकीय प्राथमिक संस्कृत विद्यालय खोले गये हैं। उन्होंने जिलेवार विवरण सदन के पटल पर रखा। 


डॉ. गर्ग ने बताया कि वर्ष 2019 में राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा संशोधित विज्ञापन जारी कर प्राध्यापक विद्यालय के विभिन्न विषयों के 264 पदों के लिये प्रतियोगी परीक्षा हेतु विज्ञापन जारी कर आवेदन पत्र आमंत्रित किये गये हैं। प्राध्यापक विद्यालय के अन्य 22 पदों की भर्ती हेतु कार्यवाही आयोग के स्तर पर प्रक्रियाधीन है। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ अध्यापक के विभिन्न विषयों के 718 पदों के लिये राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा  प्रतियोगी परीक्षा का परिणाम घोषित किया जाकर पात्रता जांच कांउसलिंग का कार्य किया जा रहा है।  

सरकार का महाविद्यालयों में मजबूत आधारभूत ढ़ांचे, गुणवत्ता युक्त शिक्षा, प्लेसमेंट व प्रशिक्षण पर जोर- तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री


जयपुर, 2 मार्च। तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुभाष गर्ग ने सोमवार को विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार का प्रयास प्रदेश में नवीन महाविद्यालय खोलने की बजाय पहले से ही संचालित राजकीय व निजी महाविद्यालयों के नियमित संचालन, मजबूत आधारभूत सुविधा, गुणवत्ता युक्त शिक्षा, विद्यार्थियों के प्लेसमेंट तथा प्रशिक्षण पर जोर देना है। 


डॉ. गर्ग प्रश्नकाल में विधायकों द्वारा इस संबंध में पूछे गये पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि देश में तकनीकी शिक्षा की स्थिति को देखते हुए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् द्वारा एक समिति का गठन किया। समिति की अभिशंसा के आधार पर एआईसीटीई द्वारा निर्णय लिया गया कि आगामी दो सत्रों में देश में निजी क्षेत्र में अभियांत्रिकी महाविद्यालय नहीं खोला जायेगा। 
उन्होंने कहा कि राजकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालयों में 5278 विद्यार्थियों की क्षमता के अनुपात में वर्तमान में 1813 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। इसी प्रकार निजी महाविद्यालयों में 33 हजार 420 सीटों पर 10 हजार 278 विद्यार्थी ही पंजीकृत हैं। 


इससे पहले विधायक श्री कन्हैया लाल के मूूल प्रश्न के जवाब में डॉ. गर्ग ने बताया कि राजकीय क्षेत्र में नया अभियांत्रिकी महाविद्यालय खोलने हेतु राज्य सरकार के कोई मानदंड निर्धारित नहीं है। राजकीय क्षेत्र में नया अभियांत्रिकी महाविद्यालय खोलने का निर्णय, क्षेत्रीय आवश्यकताओं के गुणावगुण के आधार पर आंकलन करते हुए किया जाता है।

गर्ग ने बताया कि नया अभियांत्रिकी महाविद्यालय खोलने की प्रक्रिया व मानदंड अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद्, नई दिल्ली, भारत सरकार द्वारा निर्धारित है जो कि प्रति वर्ष अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् द्वारा जारी Approval Process Hand Book  में उल्लेखित होते हैं। उन्होंने आगामी सत्र 2020-21 में खोले जाने वाले नये अभियांत्रिकी महाविद्यालयों की निर्धारित प्रक्रिया व मानदंड अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद द्वारा जारी वर्ष 2020-21 Approval Process Hand Book  का चेप्टर-एक की प्रति सदन के पटल पर रखी।


उन्होंने बताया कि प्रदेश में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद द्वारा नये अभियांत्रिकी महाविद्यालयों के निरीक्षण एवं मानदंडों के पूर्ण होने के बाद अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् द्वारा जारी Letter of Approval प्राप्त होने के पश्चात ही विश्वविद्यालय द्वारा सम्बद्धता प्रदान करने की कार्यवाही की जाती है।


डॉ. गर्ग ने बताया कि मालपुरा जिला टोंक में आता है। टोंक जिले की निवाई तहसील में पूर्व से ही निजी जन सहभागिता योजनान्तर्गत एक अभियांत्रिकी महाविद्यालय संचालित है, जिसमें गत तीन शैक्षणिक सत्रों में नामांकित छात्रों की संख्या शून्य है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में विभाग के समक्ष विधान सभा क्षेत्र मालपुरा में नवीन राजकीय अभियांत्रिकी महाविद्यालय खोलने की कार्यवाही विचाराधीन नहीं है।

बीएससी नर्सिंग कोर्स विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से संबद्ध कोर्सेज की सूची में पहले से ही शामिल, मान्यता की जरूरत नहीं – चिकित्सा राज्य मंत्री

जयपुर,  2 मार्च। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री डॉ. सुभाष गर्ग ने सोमवार को विधान सभा में कहा कि बीएससी नर्सिंग कोर्स विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से संबद्ध कोर्सेज की सूची में पहले से ही शामिल है। यूजीसी ऎसे किसी कोर्स को अलग से मान्यता नहीं देती है। 


डॉ. गर्ग ने प्रश्नकाल के दौरान विधायकों की ओर से इस संबंध में पूछे गये पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए बताया कि कोई भी विश्वविद्यालय यूजीसी के एक्ट के अनुसार संचालित किया जाता है, उसे यूजीसी से कोई अनुमति लेने की जरूरत नहीं होती। उन्होंने बताया कि यूजीसी की सूची में बीएससी नर्सिंग कोर्स पहले से ही शामिल है। इसलिए बीएससी नर्सिंग के लिए यूजीसी की मान्यता जरूरी नहीं है। उन्होंने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की डिग्री बिल्कुल मान्य है और मान्य रहेगी।


विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सी.पी जोशी ने राज्य मंत्री को हिदायत देते हुए कहा कि यदि केवल विश्वविद्यालय बीएससी नर्सिंग को मान्यता देता है और यूजीसी मान्यता नहीं देता तो कोई विद्यार्थी राज्य के बाहर की नौकरियों के लिए आवेदन नहीं कर पाएगा। इसलिए यूजीसी से बात कर इसकी जांच करवा लें। 


इससे पहले चिकित्सा राज्य मंत्री ने विधायक श्रीमती मीना कंवर के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में वर्ष 2015-16 में अब तक बीएससी नर्सिग (आयुर्वेद) पाठयक्रम के अन्तर्गत नामांकित  विद्यार्थियों की वर्गवार, वर्षवार सूची सदन के पटल पर रखी। 


डॉ. गर्ग ने बताया कि विश्वविद्यालय, राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय अधिनियम, 2002 की धारा 5 एवं धारा 18 के विभिन्न खंडों में विहित प्रावधानान्तर्गत आयुर्वेद एवं भारतीय चिकित्सा पद्धति का कोई भी शिक्षण, प्रशिक्षण उपलब्ध कराने, उपाधियां डिप्लोमा स्थापित करने, अनुमोदित पाठ्यक्रम अनुसार परीक्षाएं आयोजित करने व उपाधियां प्रदान करने के लिए अधिकृत है। तदनुसार, पाठ्यक्रम को प्रारम्भ करने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की मान्यता या संबंधन आवश्यक नहीं है, यूजीसी की मान्यता की आवश्यकता इस डिग्री को स्नातक डिग्री के समतुल्य बनाने के लिए आवश्यक है या नहीं, इसके लिए यूजीसी से पत्राचार किया गया है।


चिकित्सा राज्य मंत्री ने बताया कि पाठ्यक्रम को प्रारम्भ करने के लिए यूजीसी की मान्यता आवश्यक है अथवा नहीं, इसके लिए यूजीसी से मार्गदर्शन प्राप्त करने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। उन्होंने राशि व्यय का विवरण भी सदन के पटल पर रखा। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 के अध्याय 4 के अनुसार बीएससी नर्सिग (आयुर्वेद) कोर्स की  मान्यता या सम्बन्धता के  क्रम में यूजीसी से मार्गदर्शन प्राप्त किया जा रहा है ।

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