गोर्वधन पर्वत का लघु भ्राता है काला पहाड,पथैना धनेरी गुफा है आस्था का केन्द्र

Last Updated on June 22, 2020 by Shiv Nath Hari

गोर्वधन पर्वत का लघु भ्राता है काला पहाड,पथैना धनेरी गुफा है आस्था का केन्द्र

Kala Pahad is the miniature brother of Mount Govardhan, Pathana Dhaneri Cave is the center of faith.
गोर्वधन पर्वत का लघु भ्राता है काला पहाड,पथैना धनेरी गुफा है आस्था का केन्द्र

हलैना/भरतपुर(विष्णु मित्तल) अलवर-दौसा जिला की सीमा पर भरतपुर जिला के उपखण्ड के गांव पथैना से करीब दो किमी दूर काला पहाड की तलहटी में स्थित श्री धनेरी गुफा वाला हनुमान आस्था का केन्द्र है,जो भगवान श्री कृष्ण-वलराम युग की है,यहां हिसंक जंगली जानवरों का बसेरा है और मयूर-वानरों की स्थली है। प्रतिदिन भारी सख्यां में सन्त एवं श्रद्वालुं दर्शन को आते है। क्षेत्र के बुर्जग लोगों का कहना है कि भगवान श्री कृष्ण-वलराम मथुरापुरी को छोड कर द्वारिकाधाम इसी गुफा के माध्यम से गए,ये गुफा विश्वकर्मा जी द्वारा निर्मित है। काला पहाड एवं गुफा को लेकर अनेक किदवंतियां है,जिन पर सन्त एवं श्रद्वालुं आज भी विश्वास करते है। काला पहाड एवं गुफा की राजस्थान सहित अन्य प्रान्त के लोग पूर्णिमा एवं अमावश्या को लोग दर्शन एवं परिक्रमा देने आते है और मनोकामनाए पूरी होने पर गोठ का आयोजन कर प्रसादी वितरण करते है।

गोर्वधन का है काला पहाड लघु भ्राता

गांव पथैना सरपंच स्नेहलता बृजेशसिंह तथापूर्व उप सरपचं दर्यावसिंह ने बताया कि काला पहाड भी ब्रज की धरोहर है,जो गोर्वधन पर्वत का लघु भ्राता कहलाता है। जिसको लेकरे किदवंती है कि भगवान श्रीराम द्वारा लंका पर चढाई केलिए नल-नीर के सहयोग से समुद्र पर पुल का निर्माण कराया जा रहा था,जब राजा सुग्रीव के हनुमान,अंगद सहित अन्य वानर हिमाचल से पर्वत ला रहे थे,समुद्र का कार्य पूर्ण होते ही श्रीराम ने आदेश दिए कि अब पर्वत नही लाए,जो रास्ता में लेकर चल रहे है,उन्हे उसी स्थान पर छोड आए। आदेश की पालना करते हुए हनुमान जी के पास गोर्वधन एवं अंगद जी के पास काला पहाड था,दोनो ने पर्वत उसी स्थान पर रख दिए। दोनो पर्वत रोए कि हम दो भगवान श्रीराम के दर्शन एवं उनके चरण स्पर्श के भूखे है। हनुमान व अंगद ने दोनो पर्वत को अगले युग में भगवान के दर्शन तथा कलियुग में पूजा जाने का वरदान दिया। आज गोर्वधन पर्वत मथुरा-भरतपुर जिला तथा काला पहाड भरतपुर-दौसा जिला की सीमा में स्थित है और कलियुग में पूजे जा रहे है।

रणछोड कह लाए श्रीकृष्ण

गंाव पथैना के पूर्व सरपचं ठाकुर भूपेन्द्रसिंह एवं निवर्तमान जिला परिषद सदस्य आशा सतेन्द्रसिंह ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कंस के वध किए जाने बाद कंस का साला जरासन्द ने श्रीकृष्ण से बदला लेने को कई बार मथुरापुरी पर आक्रमण किए,लेकिन जरासन्द का मरण भगवान श्रीकृष्ण-वलराम के हाथ नही था,जिसको लेकर श्रीकृष्ण-वलराम की हलैना के पास वनखण्डी आश्रम पर मंथना हुई और मथुरापुरी छोड कर द्वारिकापुरी बसाने का निर्णय लिया। दोनो भाई सहित यादव सेना ने जरासन्द को चकमा दिया और काला पहाड की गुफा के माध्यम द्वारिकापुरी पहुंच गए,जरासन्द ने समझा कि दोनो भाई सेना सहित गुफा में छुपे हुए है,जिस गुफा में जरासन्द ने आग लगा और उसने समझा कि ये लोग आग में जल गए। आग से पहाड जल कर काला हो गया। जो पहाड आज भी काला है आज भी काला पहाड के नाम से जानते है।

सवा सौ मन सरसो तेल जला

भरतपुर रियासत के महाराजा विजेन्द्रसिंह ने वर्ष 1946–47 में काला पहाड की गुफा का रहस्य जानने के लिए करीब सवा सौ मन सरसों का तेल जल वाया और उसके बाद भी गुफा का रहस्य आज तक नही खुला। गांव पथैना निवासी पूर्व सरपंच जीतेन्द्रसिंह एवं शिवओम गुप्ता ने बताया कि वर्ष 1945 में महाराजा विजेन्द्रसिंह एक बार पथैना आए,गांव के लोगों ने गुफा का रहस्य बताया और कहा कि रात्रि के समय गुफा के अन्दर से झालर-घन्टा सहित हिंसक जानवरों की आवाज आती है। महाराजा विजेन्द्रसिंह ने उसी समय सेना के जवान और गांव के लोग गुफा के रहस्य को चिन्हित किए,जो सवा सौ मन सरसों तेल की मशाल जला कर गुफा के अन्दर प्रवेश किए,जो आज तक नही आए। अब गांव के लोगों ने गुफा के मुख्य दरवाजा पर दीवार चिनवा दी। दरवाजा के पास प्राचीन हनुमान की प्रतिमा है,जिसके दर्शन को सन्त एवं लोग आते है।

सडक का कराया निर्माण

गांव पथैना की धरा पर जन्म लेने वाले कृषक पुत्र नन्नूमल पहाडिया,जो आईएएस अधिकारी है और वर्तमान में सवाईमाधोपुर के जिला कलक्टर है। जब आस्था का केन्द्र धनेरी गुफा तथा पहाडी इलाका के गांवों को सडक से वंचित देखा,तो एन.एम.पहाडिया का दिल पसीज गया और जिन्होने सरकार से गांव पथैना से धनेरी गुफा तक सडक बनवाई,जिसकी आमजन सराहना करता है।