bharatpur news: बाल संरक्षण युक्त राजस्थान विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित

Bharatpur News: बाल श्रम मुक्त और बाल संरक्षण युक्त भरतपुर बनाने के लिए सभी करें प्रयास: लक्ष्मण गौड

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Last Updated on March 4, 2020 by Shiv Nath Hari

bharatpur news:  बाल संरक्षण युक्त राजस्थान विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला  आयोजित
bharatpur news: बाल संरक्षण युक्त राजस्थान विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित

भरतपुर, 03 मार्च। उपमहानिरीक्षक पुलिस लक्ष्मण गौड़ ने कहा कि लापता बच्चों की तलाश कर दस्तयाब करने पर सबसे बडा सूकून एवं पुण्य मिलता है।
उपमहानिरीक्षक पुलिस गौड मंगलवार को स्थानीय सारस चौराहा स्थित होटल ईगल नेस्ट में आयोजित बाल श्रम मुक्त और बाल संरक्षण युक्त राजस्थान विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों को मानसिक तनाव का सबसे बड़ा कारण सोशल मीड़िया है। छोटे-छोटे बच्चे कम उम्र में मोबाईल का अधिक इस्तमाल करते है। जिसके कारण बच्चे खेल के मैदान में नहीं जा रहे है और दिन प्रतिदिन बिमारी का शिकार हो रहे है। इसलिए में सभी माता-पिता से अनुरोध है कि अपने बच्चों मोबाईल से दूर रखे।

उन्होंने कहा कि बच्चों से सम्बंधित समस्याओं के निस्तारण के लिए पुलिस सदैव तत्पर रहेगी। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को माता-पिता की मृत्यु होने पर शोक समय के साथ-साथ कम हो जाता है लेकिन लापता बच्चों का गम माता-पिता को पूरे जीवनभर सालता रहता है। उन्होंने प्लास्टिक व पाॅलिथिन त्यागने का आहृवान करते हुए कहा कि इससे होने वाले दुष्परिणामों से जीवन दुखमय बना रहता है। उन्होंने कहा कि भावी पीढी के संरक्षण के लिए प्रत्येक व्यक्ति को 5-5 पेडों का रोपण करना होगा जिससे भावी पीढी स्वस्थ रह सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे मैरिज होमों को नोटिस जारी करें कि मैरिज होमों को बाल श्रम मुक्त रखा जाये अन्यथा कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने बच्चों की परीक्षाओं को मद्देनजर रखते हुए व ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए लाउडस्पीकरों एवं डीजे पर निर्धारित समयसीमा की पाबंदी रखने को कहा।


कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव राजेन्द्र चैधरी ने कहा कि अपराध मुक्त समाज की अवधारणा को सफल बनाने के लिए लोगों की मानसिकता में बदलाव लाना होगा। उन्होंने आमजन का आहृवान किया कि वे अपराध प्रभावित परिवारों को समाज की मुख्यधारा से जोडने के लिए उन्हें पूरा सहयोग दें। उन्होंने विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा सामाजिक सरोकारों के तहत किये गये कार्यों में शिक्षा से वंचित बच्चों को शिक्षा से जोडने एवं बच्चों के स्वास्थ्य के लिए स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने की बात कही। उन्होंने बताया कि प्राधिकरण द्वारा लगभग 1900 बच्चों को शिक्षा से जोडा जिनमें 900 बालिकाएं भी शामिल हैं तथा प्राधिकरण द्वारा 1267 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया गया। उन्होंने निःशुल्क विधिक सेवा सहायता एवं राजस्थान प्रतिकर कानून के साथ ही बाल विवाह अधिनियम के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण के लिए भामाशाहों का पूरा-पूरा सहयोग लिया जाये। उन्होंने बाल गृहों में स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण तैयार कर आवासियों को सकारात्मक कार्यों से जोडें साथ ही उनके परिवारों को सम्बल प्रदान कर घरेलु वातावरण देने का भी प्रयास करें।


कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मूल सिंह राणा ने कहा कि बाल अधिकारी एवं बाल संरक्षण एक कानूनी समस्या के साथ ही सामाजिक कुरीति है जिसे हम सभी के द्वारा किये जाने वाले छोटे-छोटे प्रयासों की पहल की जा सकती है। उन्होंने कहा कि यह हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है कि हम समाज को बालश्रम से मुक्त कराकर बच्चों का बचपन छिनने से बचायें।


प्रयत्न संस्था के निदेशक योगेश जैन ने बताया कि प्रयत्न संस्था का मुख्य उद्धेश्य लोगों की असमानता और अन्याय की स्थिति में परिवर्तन लाना है। प्रयत्न मुख्य रूप से लोगों में शिक्षा एवं जागरूकता का संचार तथा सामुदायिक संगठन द्वारा सामाजिक परिवर्तन के प्रति कटिबद्व है। हमारे कार्य का आधार दलितों एवं पिछडे वर्गो की क्षमता का विकास करना है।
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष गंगाराम पाराशर ने बताया कि बच्चों के मुद्दों पर जन जाग्रित की आवश्यकता है। बाल श्रम एक अभिशाप है, इसको हम सभी मिलकर भरतपुर जिले को बाल श्रम मुक्त और बाल संरक्षण युक्त बनाने का पूरा प्रयास करेंगे।


मुख्य वक्ता बाल संरक्षण विशेषज्ञ/एड़वोकेसी आॅफिसर प्रयत्न संस्था के राकेश कुमार तिवाड़ी ने बताया कि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के बारे में भारत विविधताओं वाला देश है। देश में विभिन्न जाति, धर्म, समुदाय, संस्कृति के लोग विभिन्न परिस्थितियों में निवास करते है। देष में 80 प्रतिशत जनसंख्या गाॅव में निवास करती है, जिसमें लगभग 41 प्रतिशत जनसंख्या 0-18 वर्ष के बच्चों की है। बच्चों को देश का भविष्य कहा जाता है, लेकिन विषम परिस्थितियों में जीवन यापन करने वाले बच्चों के आंकड़ों के अभाव में बनने वाली नीतियां, योजनाएं, कानून बच्चों की जरूरतों की पूर्ति नहीं कर पाती है। सरकार द्वारा बाल संरक्षण से संबंधित बनाये गये कानूनों एवं योजनाओं का धरातल पर सुचारू रूप से क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है।


समारोह का संचालन कवि हरिओम हरी ने किया तथा उन्होंने बाल अधिकार एवं संरक्षण पर काव्यपाठ की प्रस्तुति भी दी।


कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डाॅ. मूल सिंह राणा, बाल कल्याण समिति की पूर्व सदस्य श्रीमती प्रज्ञा मिश्रा, राजाराम, मदन मोहन शर्मा, नरेन्द्र सिंह, अनुराधा, सामाजिक सुरक्षा अधिकारी प्रवीण, रामरतन आदि ने अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम में प्रयत्न संस्था के दीपक, जगत नारायण, विनोद, चाईल्ड लाईन के दिनेश सिंह, बाल कल्याण पुलिस अधिकारी सुरेन्द्र्र सिंह, रणवीर सिंह, हरीश आदि व्यक्तियों ने भाग लिया।  

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