Adhik maas 2020: 19 वर्ष बाद संयोग अश्वनी मास में अधिकमास, जरूर करें ये पूजा, होंगे कई फायदे

Last Updated on September 15, 2020 by Shiv Nath Hari

Adhik maas 2020: 19 वर्ष बाद संयोग अश्वनी मास में अधिकमास, जरूर करें ये पूजा, होंगे कई फायदे

Adhik maas 2020: After 19 years coincidence, more worship in Ashwani month, definitely do this worship, there will be many benefits
Adhik maas 2020: After 19 years coincidence, more worship in Ashwani month, definitely do this worship, there will be many benefits

Adhik maas 2020: तीन साल में एक बार आने वाला भगवान विष्णु का प्रिय अधिकमास, मलमास या पुरुषोत्तम मास इस बार 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक रहेगा। हिन्दू पंचांग के अनुसार मलमास या अधिक मास का आधार सूर्य और चंद्रमा की चाल से है। सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है, वहीं चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। इन दोनों वर्षों के बीच 11 दिनों का अंतर होता है और यही अंतर तीन साल में एक महीने के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को दूर करने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास आता है व इसी को मलमास कहा जाता है।

अधिकमास के अधिपति स्वामी भगवान विष्णु माने जाते हैं। पुरुषोत्तम भगवान विष्णु का ही एक नाम है। इसीलिए अधिकमास को पुरूषोत्तम मास के नाम से भी पुकारा जाता है।शास्त्रों में इस मास में भगवान विष्णु का पूजन कई गुना फलदाई बताया गया है।

Adhik maas 2020: अधिक मास में शालिग्राम के पूजन का महत्व

Adhik maas 2020: प्राचीन धर्मग्रंथों में पुरुषोत्तम मास में विष्णु स्वरुप शालिग्राम के साथ श्री महालक्ष्मी स्वरूपा श्री यंत्र का पूजन सयुंक्त रूप से करने का काफी महत्व बताया गया है। पुराणों में शालिग्राम को ब्रह्माण्डभूत श्री नारायण का प्रतीक माना जाता है। पदम पुराण के अनुसार जो शालिग्राम का दर्शन करता है उसे मस्तक झुकाता, स्न्नान कराता और पूजन करता है वह कोटि यज्ञों के समान पुण्य तथा कोटि गोदानों का फल पाता है।

इनके स्मरण, कीर्तन, ध्यान, पूजन और प्रणाम करने पर अनेक पाप दूर हो जाते हैं। जिस स्थान पर शालिग्राम और तुलसी होते हैं। वहां भगवान श्री हरि विराजते हैं और वहीं सम्पूर्ण तीर्थों को साथ लेकर भगवती लक्ष्मी भी निवास करती हैं। पदमपुराण के अनुसार जहां शालिग्राम शिलारुपी भगवान केशव विराजमान हैं वहां सम्पूर्ण देवता, असुर, यक्ष तथा चौदह भुवन मौजूद हैं। जो शालिग्राम शिला के जल से अपना अभिषेक करता है,उसे सम्पूर्ण तीर्थों में स्न्नान के बराबर और समस्त यज्ञों को करने समान ही फल प्राप्त होता है। 

Adhik maas 2020: शिवजी ने बताई शालिग्राम की महिमा

Adhik maas 2020: भगवान कार्तिकेय के पूछने पर भगवान शिव ने शालिग्राम की महिमा का गान करते हुए कहा है कि करोड़ों कमल पुष्पों से मेरी पूजा करने पर जो फल प्राप्त होता है वही शालिग्राम शिला के पूजन से कोटि गुना होकर मिलता है। मेरे कोटि-कोटि लिंगों का दर्शन, पूजन और स्तवन करने से जो फल मिलता है वह एक ही शालिग्राम के पूजन से प्राप्त हो जाता है। जहां इनका पूजन होता है वहां पर किया हुआ दान, स्नान काशी से सौ गुना अधिक फल देने वाला माना गया है। शालिग्राम को अर्पित किया हुआ थोड़ा सा तुलसीपत्र, पुष्प, फल, जल, मूल और दूर्वादल भी मेरुपर्वत के समान महान फल देने वाला होता है।

Adhik maas 2020: ऐसे करें पूजा

Adhik maas 2020: पुरुषोत्तम मास के पहले दिन प्रातः काल नित्य नियम से निवृत हो श्वेत या पीले वस्त्र धारण कर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके किसी ताम्र पात्र में पुष्प बिछाकर शालिग्राम स्थापित करें। फिर शुद्धजल में गंगाजल मिलाकर,श्री विष्णुजी का ध्यान करते हुए स्न्नान कराएं। इसके बाद शालिग्राम विग्रह पर चन्दन लगाकर तुलसी पत्र, सुगन्धित पुष्प,नैवेद्य, फल आदि अर्पित करें। यथा शक्ति ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जप करने के उपरान्त कपूर से आरती करें। अभिषेक के जल को स्वयं एवं परिवार के सदस्यों को ग्रहण कराएं। इसी के साथ श्रीमदभागवत कथा, गीता का पाठ,श्री विष्णु सहस्त्र्नाम का पाठ पुरुषोत्तम मास में करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

कैसे शालिग्राम रखें

छत्राकार शालग्राम के पूजन से राज्य सुख आदि एवं वर्तुलाकार की पूजा से धन-ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। विकृत फटे हुए,शूल के नोक के समान,शकट के आकार के पीलापन लिए हुए,भग्न चक्र वाले शालिग्राम दुःख,दरिद्रता,व्याधि,हानि के कारण बनते हैं अतः इन्हें घर,मंदिर में नहीं रखना चाहिए। शालिग्राम,तुलसी और शंख को जो व्यक्ति श्रद्धा से सुरक्षित रखता है उससे भगवान श्री हरि बहुत प्रेम करते हैं।

Adhik Maas 2020 : अधिकमास 18 सितंबर से शुरू हो रहा है, जिसका 16 अक्टूबर को समापन होगा। इस साल अधिक मास में 15 दिन शुभ योग रहेगा। अधिक मास के दौरान सर्वार्थ सिद्धि योग 9 दिन, द्विपुष्कर योग 2 दिन, अमृत सिद्धि योग 1 दिन और पुष्य नक्षत्र का योग दो दिन बन रहा है। पुष्य नक्षत्र भी रवि और सोम पुष्य होंगे।पौराणिक सिद्धांतों के अनुसार इस मास के दौरान यज्ञ-हवन के अलावा श्रीमद् देवीभागवत, श्री भागवत पुराण, श्री विष्णु पुराण, भविष्योत्तर पुराण आदि का श्रवण, पठन, मनन विशेष रूप से फलदायी होता है।

अधिक मास के अधिष्ठाता भगवान विष्णु जी हैं, इसीलिए इस पूरे समय में भगवान विष्णु जी के मंत्रों का जाप विशेष लाभकारी होता है।

शुक्ल नाम के शुभ योग में अधिक मास की शुरुआत

Adhik maas 2020: शास्त्रों के अनुसार अधिक मास की शुरुआत 18 सितंबर को शुक्रवार, उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र और शुक्ल नाम के शुभ योग में होगी। ये दिन काफी शुभ रहेगा। इस महीने में 26 सितंबर एवं 1, 2, 4, 6, 7, 9, 11, 17 अक्टूबर सर्वार्थसिद्धि योग भी होने से लोगों की मनोकामनाएं पूरी होंगी। इसके अलावा 19 व 27 सितंबर को द्विपुष्कर योग भी है। इस योग में किए गए किसी भी काम का दोगुना फल मिलता है। इस बार अधिक मास में दो दिन पुष्य नक्षत्र भी पड़ रहा है। 10 अक्टूबर को रवि पुष्य और 11 अक्टूबर को सोम पुष्य नक्षत्र रहेगा। यह ऐसी तारीखें होंगी, जब कोई भी आवश्यक शुभ काम किया जा सकता है। यह तिथियां खरीदार इत्यादि के लिए शुभ मानी जाती हैं। इसलिए इन तिथियों में की गई खरीदारी शुभ फलकारी होती है।

Adhik maas 2020: कोरोना का असर देगा दिखाई

Adhik maas 2020: दान, पुण्य, पूजा-पाठ व श्रीमद् भागवत कथा के लिए मास पुरुषोत्तम पवित्र महीना माना जाता है। इस महीने में भक्ति की गंगा बहती है। देशभर में श्रीमद् भागवत कथा प्रसंगों की गूंज सुनाई देती है, लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के कारण कथा प्रसंगों की गूंज सुनाई देगी, ऐसी संभावना कम ही लग रही है। वहीं कुछ लोग तीर्थ यात्रा भी करते हैं, उनकी यात्रा में कोरोना संक्रमण बाधा बन सकता है। 19 वर्ष बाद ऐसा संयोग बना है, जब अश्वनी मास में पुरुषोत्तम मास मनाया जाएगा। इसके पहले यह संयोग वर्ष 2001 में बना था। यह महीना भगवान विष्णु जी की भक्ति, आराधना के लिए जाना जाता है। भगवान विष्णु जी की भक्ति, उपासना और श्रीमद्भ भागवत कथा सुनने से कई गुना फल की प्राप्ति होती है।

अधिक मास की यह है कथा

Adhik maas 2020: पौराणिक कथाओं के अनुसार मलमास होने के कारण कोई इस मास का स्वामी होना नहीं चाहता था, तब इस मास ने भगवान विष्णु से अपने उद्घार के लिए प्रार्थना की। प्रार्थना से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु जी ने उन्हें अपना श्रेष्ठ नाम पुरषोत्तम प्रदान किया। साथ ही यह आशीर्वाद दिया कि जो इस माह में भागवत कथा श्रवण, मनन, भगवान शंकर का पूजन, धार्मिक अनुष्ठान, दान आदि करेगा, वह अक्षय फल प्रदान करने वाला होगा। इसलिए यह माह दान-पुण्य अक्षय फल देने वाला माना जाएगा।

अधिकमास में जरूर करें दक्षिणावर्ती शंख की पूजा, होंगे कई फायदे

Adhik maas 2020: हिन्दू धार्मिक कर्मकांड में शंख बजाने की परंपरा है। शंख को मांगलिक कार्यों, विवाह, धार्मिक अनुष्ठानों और रोजाना पूजा-पाठ में बजाने का नियम है। शास्त्रों में घर के पूजा स्थान में शंख का होना बेहद शुभ माना गया है। शंख बजाने का धार्मिक महत्व के साथ वैज्ञानिक महत्व भी है। शंख की ध्वनि वातावरण शुद्ध करती हैं। साथ ही इसको बजाने से कई तरह के जीवाणु नष्ट हो जाते हैं। आइए जानते हैं शंख का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व.

शंख का धार्मिक महत्व

कहा जाता है कि शंख की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी

शंख उन 14 रत्नों में से एक था जो समुद्र से निकले थे। विष्णु पुराण के अनुसार, शंख को माता लक्ष्मी जी का भाई माना गया है। इसलिए जिस घर में शंख होता है उस घर में लक्ष्मी माता का वास जरूर होता है। शास्त्रों में तीन प्रकार के शंख बताए गए हैं जिनमें पहला दक्षिणावृत्ति, मध्यावृति और वामवृत्ति। इनमें दक्षिणावृत्ति शंख विष्णु जी को प्रिय है।

Adhik maas 2020: वैज्ञानिक दृष्टि से शंख का महत्व


वैज्ञानिक रूप से यह सिद्ध हो चुका है कि शंख की ध्वनि वातावरण में व्याप्त कीटाणुओं को नष्ट कर देती है। साल 1928 में बर्लिन विश्वविद्यालय ने इस संबंध में शोध पत्र प्रकाशित किया था। जिसमें शंख की ध्वनि को कीटाणुओं को नष्ट करने की औषिधि बताया गया था। इसके अलावा हकलाने की समस्या भी शंख को बजाने से दूर होती है। यह भी सिद्ध हो चुका है। शंख और भी कई फायदे हैं..

Adhik maas 2020: स्तु और फेंगशुई में शंख का महत्व

वास्तु और फेंगशुई के अनुसार, शंखनाद और शंख रखने के कई फायदे हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार शंख नियमित रूप से बजाना सेहत के लिए बेहतर होता है। फिर चाहे छोटा शंख हो या बड़ा। मान्यता है कि शंख बजाने से हृदय संबंधी बीमारियां नहीं होती।

घर में शंख रखना होता है बेहद शुभ

Adhik maas 2020: फेंगशुई के मुताबिक शंख रखना बेहद शुभ होता है। यह कार्यक्षेत्र में सुख-समृद्धि लेकर आता है। इसे रखने मात्र से ही व्यवसाय-व्यापार में वृद्धि होती है। शंख भगवान बुद्ध के पैरों में बने 8 शुभ चिन्हों में से एक है।