श्री भरत मन्दिर के महन्त आदरणीय श्री अशोक प्रपन्नाचार्य जी महाराज के निधन पर शोक संवेदना और भावभीनी श्रद्धाजंलि

Last Updated on July 8, 2020 by Shiv Nath Hari

परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी

श्री भरत मन्दिर के महन्त आदरणीय श्री अशोक प्रपन्नाचार्य जी महाराज के निधन पर शोक संवेदना और भावभीनी श्रद्धाजंलि

8 जुलाई, ऋषिकेश। श्री भरत मन्दिर के महन्त आदरणीय श्री अशोक प्रपन्नाचार्य जी महाराज के निधन पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने उन्हें दो मिनट मौन रखकर श्रद्धाजंलि अर्पित करते हुये कहा कि प्रभु अपने श्री चरणों में उन्हें स्थान प्रदान करें और उनकी आत्मा को दिव्य शान्ति प्राप्त हो।

परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने श्री भारत मंदिर के महंत आदरणीय श्री अशोक प्रपन्नाचार्य जी महाराज के निधन पर दुःख व्यक्त करते हुये कहा कि जैसे ही यह दुखद समाचार सुना, विश्वास न हुआ, लगता है कि वे अभी भी सामने है। स्वामी जी ने कहा कि श्री भारत मंदिर के महंत आदरणीय श्री अशोक प्रपन्नाचार्य जी महाराज ने भगवान के श्री चरणों में स्थान प्राप्त किया। वे एक अद्भुत व्यक्तित्व थे, वे जब भी मिले, जिससे भी मिले, दिल खोल के मिले। उन्होने जो किया वह दिल से किया सबके लिए किया, चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो या चिकित्सा का क्षेत्र हो या फिर सामाजिक गतिविधियां हो, या सांस्कृतिक गतिविधियां हो वे सबको साथ लेकर चलते थे।

स्वामी जी ने कहा कि उनके द्वारा खड़ी की गई अनेकों संस्थाएं केवल उत्तराखंड की ही नहीं बल्कि अनेक जगह पर सेवाएं कर रहे हैं। उनका भरा पूरा परिवार है समाज सेवा में सक्रिय और समर्पित उनके छोटे भाई श्री हर्षवर्धन जी, उनके दोनों सुपुत्र श्रीवत्सल जी और श्री वरुण शर्मा जी उन सबके लिए भी भगवान से प्रार्थना है कि प्रभु पूरे परिवार को इस असहनीय दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें, ऐसी आत्माएं सच मानिए, कभी छोड़कर जाती नहीं, वह हम सबके बीच रहती है। ऋषिकेश में तो उनकी आत्मा बसती है और बसती रहेगी। शरीर रूप में अब हम उन्हें नहीं देख पाएंगे लेकिन उनके द्वारा किये गये कार्य अनेकों लोगों को प्रेरणा देते रहेंगे। उनके तो नाम में ही अशोक जुड़ा है, जो अशोक है उनके लिए शोक करना भी नहीं बनता है, वे प्रपन्न है, प्रभु की शरण में है, वे भरत जी महाराज की शरण में हमेशा समर्पित रहे और हमेशा समर्पित रहेंगे, ऐसा मेरा विश्वास है।

आदरणीय श्री अशोक प्रपन्नाचार्य जी महाराज वर्ष 1956 में भरत मन्दिर के गद्दी नसीन हुये थे। साथ ही श्री भरत मन्दिर द्वारा संचालित शिक्षण संस्थाओं श्री भरत मन्दिर इण्टर कॉलेज, श्री भरत मन्दिर संस्कृत महाविद्यालय, ज्योति विशेष विद्यालय के साथ ही उत्तराखंड एवं अन्य स्थानों की धार्मिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं के संचालन एवं संवर्द्धन में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। वे श्री भरत मंदिर एजुकेशन सोसाइटी व शिक्षण संस्थाओं के संचालक मंडल के अध्यक्ष पद भी थे।

स्वामी जी ने महन्त आदरणीय श्री अशोक प्रपन्नाचार्य जी महाराज के निधन पर शोक संवेदनायें तथा भावपूर्ण श्रद्धाजंलि अर्पित की तथा उनके साथ बीते हुये क्षणों की स्मृतियों को संजोया।
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