Rajasthan: Human Rights Commission issued guidelines for prevention of corona virus

राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मण्डल के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन का लाभ दिया जायेगा- शिक्षा राज्य मंत्री

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Last Updated on March 3, 2020 by Shiv Nath Hari

जयपुर, 3 मार्च। शिक्षा राज्य मंत्री श्री गोविंद सिंह डोटासरा ने मंगलवार को विधानसभा में आश्वस्त किया कि राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन देने की प्रक्रिया को शीघ्र पूरा कर कर्मचारियों को पेंशन का लाभ दिया जाएगा।    श्री डोटासरा शून्यकाल में विधायक श्री गुलाबचंद कटारिया द्वारा राजस्थान राज्य पाठ्य पुस्तक मंडल के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उच्च न्यायालय के निर्णय के उपरांत भी पेंशन परिलाभ नहीं देने के संबंध में रखे गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर अपना जवाब दे रहे थे।     उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में ज्योहीं हमारी एसएलपी रिव्यू पिटीशन खारिज हुई उसके बाद हमने तत्काल निर्णय लिया और 8 जनवरी 2020 को वित्त विभाग के इस निर्णय कि पैसा मंडल भरेगा, उसमे हमने भी सहमति दे दी। यह सही है कि इसका निर्णय वर्ष 1994 में हो गया, लेकिन कार्यवाही करने में विलंब हुआ है।


श्री डोटासरा ने बताया कि राजस्थान पाठ्य पुस्तक मंडल के कर्मचारियों को पेंशन की योजना का लाभ देने के उद्देश्य से दिनांक 1 अप्रैल 1994 को भविष्य निधि योजना के स्थान पर कर्मचारी पेंशन विनिमय 1994 लागू करने का निर्णय लिया गया, जिसकी सरकार ने 28 मई, 1994 को स्वीकृति दी। उन्होंने बताया कि 19 दिसंबर, 1994 को कर्मचारियों से विकल्प मांगे गए और जो अंशदान जमा था,  उसे भी वापस मांगा गया। उन्होंने बताया कि 27 फरवरी, 1996 को राजस्थान राज्य पाठ्य पुस्तक मंडल के निष्पादक मंडल ने निर्णय लिया कि कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि योजना ठीक है या पेंशन निधि योजना। लेकिन उसके बाद में वर्ष 2014 तक किसी भी कर्मचारी या अन्य किसी ने कोई मांग नहीं की तथा न ही सरकार ने कोई निर्णय लिया।        

उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में लोग कोर्ट में गए तो कोर्ट में जाने के बाद 29 नवंबर, 2017 को हाईकोर्ट का फैसला कर्मचारियों के हित में आया। उसके बाद सरकार ने निर्णय लिया कि हमें डीबी में जाना है। डीबी में जाने पर 12 अप्रैल, 2018 को डीबी में भी अपील खारिज हो गई। पाठ्य पुस्तक मंडल की ओर से जो डीबी में अपील की गई थी। उसके बाद में एस.एल.पी दायर करने का निर्णय लिया गया।     


श्री डोटासरा ने बताया कि एस.एल.पी. भी 3 जनवरी, 2019 को खारिज हो गई। फिर वित्त विभाग में जब लोग गए तो वित्त विभाग ने कहा कि रिव्यू किया जाए। उन्होंने बताया कि रिव्यू में गए तो 16 अक्टूबर, 2019 को रिव्यू भी खारिज हो गई। रिव्यू खारिज होने के बाद में जो प्रक्रिया चली उसमें सरकार को 8 जनवरी, 2020 को वित्त विभाग ने इस आशय के साथ स्वीकृति दी कि जो पैसा इनकी पेंशन में दिया जाएगा, वह पाठ्यपुस्तक मंडल वहन करेगा, सरकार वहन नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि 8 जनवरी, 2020 के बाद भी यह  प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने बताया कि प्रशासनिक आधार पर निर्णय करने के उपरांत भी इन कर्मचारियों की वह पत्रावली भी नहीं भेजी गई थी जिस पर कर्मचारियों से विकल्प लिए थे। 

     उन्होंने बताया कि इस पर भी एक समिति बनाकर तय किया गया कि यह समिति जिम्मेदारी तय करेगी जब जाकर यह पत्रावली मिली है। उन्होंने बताया कि जो यह एक-डेढ़ महीने का समय लगा है, वह इस प्रक्रिया में लगा है। उन्होंने बताया कि इस सम्बन्ध में बैठक में एक सेल बनाने का निर्णय लिया गया कि इन कर्मचारियों को पेंशन देने के लिए पेंशन विभाग में सेवानिवृत्त कर्मचारी को इस सेल में नियोजित कराकर इस प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा।


श्री डोटासरा ने कहा कि निश्चित रूप से पेंन्शन मिलनी चाहिए जब सरकारों का फैसला आया है। उन्होंने कहा कि 13 दिसम्बर, 1993 से वर्ष 30 नवम्बर, 1998 तक तत्कालीन सरकार द्वारा फैसला नहीं लेना सही नहीं है।

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