भजन सम्राट चित्र-विचित्र महाराज एवं राम गोपाल भगत को मिला संगीत गौरव अवार्ड-2020

Last Updated on August 22, 2020 by Shiv Nath Hari

  • ब्रज संस्कृति व कला विश्व की धरोहर-राधा प्रसाद महाराज
  • -चित्र-विचित्र महाराज एवं राम गोपाल भगत को मिला संगीत गौरव अवार्ड-2020
  • -श्री हरिदास जी महाराज के शिष्य थे तानसेन
  • -मुगल सम्राट अकबर हुआ नतमस्तक
भजन सम्राट चित्र-विचित्र महाराज एवं राम गोपाल भगत को मिला संगीत गौरव अवार्ड-2020
भजन सम्राट चित्र-विचित्र महाराज एवं राम गोपाल भगत को मिला संगीत गौरव अवार्ड-2020

हलैना,श्री हरिदासीय राधा प्रसाद सेवा ट्रस्ट की ओर से वृन्दावन में श्री स्वामी हरिदास महाराज के प्रादुर्भाव महोत्सव श्री स्वामी हरिदास सम्प्रदाय के पीठाधीश्वर स्वामी राधा प्रसाद महाराज की अध्यक्षता में शुरू हुआ,जिसमें वृन्दावन व मथुरा सहित ब्रज अंचल के सन्त एवं श्रद्वालुंओ ने शामिल हुए और ब्रज से विलुप्त हो रही ब्रज लोकगीत को प्रोत्साहित करने के लिए श्री स्वामी हरिदास सम्प्रदाय के पीठाधीश्वर श्री राधा प्रसाद महाराज तथा रसका पागल महाराज के सानिध्यं में ब्रज के शास्त्रीय संगीतज्ञ,कलाकर,लोकगीत गायक-गायिका आदि का सम्मान किया गया।

पीठाधीश्वर स्वामी राधा प्रसाद महाराज ने कहा कि ब्रज अंचल ही धरती का स्वर्ग है,ब्रज की संस्कृति,प्रकृति,खान-पान,भाषा और भगवान श्री कृष्ण-राधा की जन्मस्थली एवं बचपन की कलास्थली को देखने के लिए भारतीय ही नही विश्व के लोग तरसते है,ब्रज की संस्कृति व कला विश्व की धरोहर है,ब्रज में भगवान श्री कृष्ण एवं श्री राधा की जन्म हुआ,अनेक सन्त,विद्वान,साहित्यकार, शास्त्रीय संगीतज्ञ, कलाकर,लोकगीत गायक-गायिका,महापुरूष हुए,जिसका पुराण व इतिहास गवाह है।

उन्होने कहा कि श्री हरिदास महाराज ने श्री कृष्ण-राधा को स्वयं के हाथ से मक्खन सहित भोजन बना खिलाया,जिसका श्रीकृष्ण की रास स्थली निदवन गवाह है। श्री स्वामी हरिदास सम्प्रदाय के पीठाधीश्वर श्री राधा प्रसाद महाराज ने बताया कि रसिक शिरोमणि श्री स्वामी हरिदास जी महाराज जो गाया करते थे,उसे उनके आराध्य श्री प्रिया लाल जी के प्राण फल भूलते है,श्री स्वामी जी का गायन ही प्रिया लाल का रस आहार था,तब ही तो राधा वल्लभ संप्रदाय के परम रसिक श्री ध्रुवदास ने अपनी वाणी में लिखा है गान कला गंधर्व श्याम श्यामा को तो से । उत्तम भोग लगाएं मोर मर्कट तिमि से श्री स्वामी हरिदास जी बिहारी जी को उनके रूप के अनुसार लालगढ आते थे और उत्तम भोग लगाकर उसे तीन भागों में विभाजित करते थे,गगन,जल एवं थलचर और आप भी चुटकी ब्रजबासियों के आटा की बाटी बनाकर भोग लगाकर उसे ही पाकर बिहारी जी सेवा में लीन रहा करते थे,स्वामी का संगीत प्रिया लाल की रस्म प्राप्ति कराने वाला था,स्वामी के अनुयाई उसी पद्वति से आज भी समाज का इनके माध्यम से जुगल को लडाते है,स्वामी के शिष्य तानसेन को संगीत की शिक्षा प्रदान की थी,जिसकी संगीत कला से प्रभावित होकर जहां का बादशाह अकबर स्वामी के दर्शन करने आए और निधि बनाया।

भजन सम्राट रसिक महाराज ने कहा कि श्री हरिदास तो रास्तों के प्राण है और उनके कृपा बिना यह रस साधना अंसभव है। स्वामी जी की कृपा से तानसेन को सब राग-रागिनी पर भर में आर्शीवाद के रूप में प्राप्त हुई। श्री राधा प्रसाद महाराज के सेवक डाॅ0एस.के.मित्तल एवं प्रचारक विष्णु मित्तल ने बताया कि ट्रस्ट की ओर से ब्रज के लोकगीत,संगीतज्ञ एवं ब्रज की संस्कृति पर पाश्यचात संस्कृति का प्रभाव तथा विलुप्त होता देख श्री स्वामी हरिदास सम्प्रदाय के पीठाधीश्वर श्री राधा प्रसाद महाराज तथा रसका पागल महाराज के सानिध्य में लोकगीत महोत्सव-2020 का शुभारम्भ किया गया,जिसमें ब्रज के चित्र-विचित्र महाराज एवं राम गोपाल भगत बैरग अखाडा को संगीत गौरव के सम्मान से नवाजा गया। इस अवसर पर ब्रज के भजन सम्राट रसिकदास महाराज,स्वामी मोहनी बिहारी शरण महाराज,आचार्य बद्रीशजी,विष्णुदास महाराज,सुमित अग्रवाल,राहुल अग्रवाल, विष्णु मित्तल,गोविन्द उपाध्याय आदि मौजूद रहे।