अम्मा अब नही चलो जाये,सीताराम तेरा भलो हुईयो,भरतपुर में मिला भरपेट भोजन व मानवता का प्यार मददगार।

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Last Updated on May 12, 2020 by Shiv Nath Hari

अम्मा अब नही चलो जाये।
सीताराम तेरा भलो हुईयो
भरतपुर में मिला भरपेट भोजन व मानवता का प्यार
लुपिन ने बस से पहुंचाया परिवार

हलैना-भरतपुर(विष्णु मित्तल) जयपुर-आगरा नेशनल हाइवे-21 से लाॅकडाउन के कारण पैदल जा रहे प्रवासी श्रमिकों को प्रशासन,लुपिन एवं भामाशाहों द्वारा भोजन एवं जलपान की सुविधा तथा अन्य राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है,लेकिन प्रवासी श्रमिक पैदल चलते-चलते थक गए,जिनके साथ नवजात शिशु व महिलाए भी है,जो गुजरात एवं राजस्थान प्रान्त के अनेक जिला से 700 से 1200 किमी का सफर कर भरतपुर जिला में प्रवेश किया,अधिकाशं श्रमिक पैदल है,कुछ साईकिल,ढकेल,जुगाड का साधन आदि पर सवार हो कर जा रहे है। कई परिवार के बच्चा व महिलाए पैदल चल कर थक गए,जो ईश्वर-अल्लाह से घर तक सुरक्षित पहुंचे की गुहार लगाए हुए है।

भुसावर उपखण्ड क्षेत्र के भरतपुर-दौसा जिला की सीमा के गांव कमालपुरा-बाडरैन वार्डर पर मध्य प्रदेश प्रान्त के गुना जिला निवासी 9 वर्षीय राधा पैदल चल कर थक गई,बच्ची के मुख से एक ही वाक्या निकल रहे थे,अम्मा अब नही चलों जाए,मुझे यही पटक जाओं,ऐसा सुन कर माता-पिता दुःखी होकर रोने लगे। पिता कमल कुशवाह व माता मीरा ने बताया कि गांधीधाम-गुजरात से पैदल ही जयपुर तक आए,भाई सुरेश के परिवार सहित कुल 17 सदस्य है।

जयपुर में पत्नी और भाभी का जेवर बेच कर साईकिल खरीदी और उस पर बच्चो को सवार कर मध्यप्रदेश प्रान्त के गुना जिला को चल पडे,भरतपुर जिला की सीमा पर लुपिन के शिविर में भरपेट भोजन व मानवता मिली,रास्ता में लोग परिवारों को देख हसें और मजाक बनाया,फिर भी हिम्मत नही हारी,हमारी हालत देख लुपिन के अधिशासी सीताराम गुप्ता एवं आरपीएम डाॅ.राजेश शर्मा ने बच्चों को दूध,बिस्कुट,ग्लूकोस,मास्क,सेनेटाईजर उपलब्ध कराए और भोजन कराया। मेरी बच्ची राधा की हालत देख उन्होने बस द्वारा मध्यप्रदेश की सीमा तक तक पहुंचाया और आर्थिक मदद दी। लुपिन के अधिशासी निदेशक सीताराम गुप्ता के द्वारा कराई सुविधा को जीवन मे नही भूल सकते।

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