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जीरो बजट प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आगामी वर्षों में और जिलों को जोड़ा जाएगा – कृषि मंत्री

Last Updated on March 3, 2020 by Shiv Nath Hari

जयपुर, 3 मार्च। कृषि मंत्री श्री लालचंद कटारिया ने मंगलवार को विधानसभा में कहा कि प्रदेश में जीरो बजट प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आगामी वर्षों में और जिलों को जोड़ा जाएगा और इस संबंध में अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020-21 में जीरो बजट प्राकृतिक खेती के लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
श्री कटारिया प्रश्नकाल में इस संबंध में विधायकों द्वारा पूछे गये पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि विभाग के अधिकारियों द्वारा जीरो बजट प्राकृतिक खेती कर रहे राज्यों का दौरा कर अध्ययन पश्चात् इसके लिए कार्य योजना तैयार की गई है। कार्य योजना के तहत जीरो बजट प्राकृतिक खेती को ग्रामीण स्तर पर आगे बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि योजना के तहत जैविक खाद व जैविक रसायन तैयार करने की कार्यवाही प्रगतिरत है। 


इससे पहले विधायक श्री रामलाल शर्मा के मूूल प्रश्न के जवाब में श्री कटारिया ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए जीरो बजट प्राकृतिक खेती की योजना बनाई गई है। वर्ष 2019-20 के लिए राशि 2 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसके विरूद्ध अब तक रुपये 28 लाख 12 हजार का व्यय किया गया है। यह योजना टोंक, सिरोही व बांसवाड़ा जिले में प्रारंभ की गई है।


उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत किसानों को जागरूक करने, प्राकृतिक खाद तैयार करने व प्रशिक्षण देने के लिए टोंक, सिरोही व बांसवाड़ा जिलों के कार्मिकों की तीन आमुखीकरण कार्यशाला, इन जिलों के 100-100 कृषकों को ओर्गेनिक महोत्सव, उदयपुर में कृषक भ्रमण तथा एक रिसोर्स परसन कार्यशाला आयोजित की जा कर प्राकृतिक खेती के लिए प्रायोगिक एवं सैद्धांतिक जानकारी दी गई है। साथ ही 20 हजार कृषकों को ग्राम पंचायत स्तर पर प्रशिक्षण के लिए 400 ग्राम पंचायत स्तरीय (दो दिवसीय) कृषक प्रशिक्षणों का आयोजन करने की कार्य योजना के अंतर्गत अब तक 141 ग्राम पंचायत स्तरीय प्रशिक्षणों का आयोजन कर सात हजार पचास कृषकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। शेष ग्राम पंचायत पर प्रशिक्षण प्रक्रियाधीन है। उन्होेंने बताया कि इन गतिविधियों पर अब तक राशि रुपये 28 लाख 12 हजार का व्यय किया जा चुका हैं। 

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