कोटा संभाग में 303 पेंशन तथा 745 पेंशनर फिक्शेसन प्रकरणों का निस्तारण – संसदीय कार्य मंत्री

Last Updated on March 3, 2020 by Shiv Nath Hari

जयपुर, 3 मार्च। संसदीय कार्य मंत्री श्री शान्ति कुमार धारीवाल ने मंगलवार को विधानसभा में वित्त मंत्री की ओर से कहा कि कोटा संभाग में 303 पेंशन प्रकरणों के पेंशन आदेश जारी करने के साथ 745  पेंशनर फिक्शेसन प्रकरणों का निस्तारण किया जा चुका हैं। उन्होंने कहा कि पेंशनरों की मेडीकल डायरी की सीमा को बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है।
श्री धारीवाल प्रश्नकाल में इस संबंध में विधायकों द्वारा पूछे गये पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि कोटा संभाग में 31 दिसम्बर 2019 को सेवानिवृत्त अधिकारियों व कर्मचारियों के 408 पेंशन प्रकरण बकाया थे। एक मार्च 2020 तक इनमें से 303 प्रकरणों के पेंशन आदेश जारी किये जा चुके हैं। शेष 105 पेंशन प्रकरणों में से 39 प्रकरण फरवरी 2020 में आक्षेपों की पूर्ति के उपरान्त विभाग को प्राप्त हुये हैं जो प्रक्रियाधीन हैं और 66 प्रकरण संबंधित प्रशासनिक विभागों से पुनः वित्त विभाग में आना शेष हैं।


उन्होंने कहा कि पेंशन स्वीकृत करने में विलम्ब होने के संबंध में चार शिकायतें प्राप्त हुई थी, जिनका निस्तारण किया जा चुका हैं। उन्होंने कहा कि कोटा संभाग में कोषालय में 3 वर्षों से कार्यरत कनिष्ठ लेखाकार के विरूद्ध व्यवहार असंतोषजनक पाये जाने की शिकायत प्राप्त होने पर संबंधित कार्मिक को नोटिस देते हुये भविष्य में पुनरावृत्ति नहीं करने की हिदायत दी गई। श्री धारीवाल ने कहा कि राजकीय सेवारत कार्मिकों के सेवानिवृत्त होने के एक वर्ष पूर्व नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा सेवानिवृत्ति आदेश व कार्यालयाध्यक्ष द्वारा एनओसी जारी की जाती है और 6 माह पूर्व पेंशन प्रकरण पेंशन विभाग को भेजा जाता है। उन्होेंने कहा कि दस्तावेज पूर्ण होने की स्थिति में पेंशन विभाग द्वारा एक माह की अवधि में पेंशन भुगतान आदेश पी.पी.ओ, जीपीओ व सीपीओ जारी किये जाते है और यदि परीक्षण के दौरान दस्तावेज अपूर्ण पाये जाते है तो दस्तावेज पूर्ण करने के लिए सेवानिवृत्त कर्मचारी के संबंधित कार्यालय को लौटा दिये जाते है।  


उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त होने वाले कार्मिक द्वारा आक्षेपों की पूर्ति करने के उपरान्त भी यदि पेंशन विभाग 6 माह पश्चात् पीपीओ जारी करता है तो कार्मिक को 9 प्रतिशत की दर पर ब्याज दिया जाता है। उन्होंने कहा कि कोटा संभाग में सेवानिवृत्त अधिकारियों व कर्मचारियों को पेंशन में विलम्ब की अवधि के लिए 50 लाख 27 हजार 333 रुपये का भुगतान किया गया । उन्होंने कहा कि पेंशन स्वीकृत होने में विलम्ब के लिए दोषियों के विरूद्ध सीसीए नियमों के अतंर्गत अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाती है। 
उन्हाेंने कहा कि कोटा संभाग में 31 दिसम्बर 2019 तक पेंशनर्स के फिक्शेसन के 1865 प्रकरण बकाया थे और जनवरी-फरवरी, 2020 में 852 और नये प्रकरण प्राप्त हुये। इस प्रकार कुल 2 हजार 717 फिक्शेसन प्रकरणों में से 745 प्रकरणों का निस्तारण हो चुका हैं। उन्होेंने कहा कि कनिष्ठ लेखाकारों द्वारा पेंशनर्स के फिक्शेसन का कार्य किया जाता है। कनिष्ठ लेखाकारों में से अधिकांश की ड्यूटी चुनावों में लगने व इनके पद रिक्त होने के कारण भी फिक्शेसन में विलम्ब हुआ। उन्हाेंने कहा कि अब तक कोटा संभाग में पेंशन फिक्शेसन के 1972 प्रकरण ही बकाया हैं। 


इससे पहले विधायक श्री संदीप शर्मा के मूूल प्रश्न के जवाब में श्री धारीवाल ने बताया कि सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों  के कार्यालय से सेवानिवृत्त कर्मचारियों का पेंशन प्रकरण पेंशन विभाग में प्राप्त होने पर दस्तावेज पूर्ण होने की स्थिति में एक माह की अवधि में पेंशन भुगतान आदेश (पी.पी.ओ) जारी किये जाते है। परीक्षण के दौरान दस्तावेज अपूर्ण पाये जाने पर दस्तावेज पूर्ण करने के लिए सेवानिवृत्त कर्मचारी के संबंधित कार्यालय को लौटा दिये जाते है। उन्होंने बताया कि विगत 5 वषोर्ं में कोटा संभाग में सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की पेंशन के 10464 एवं पेंशनर्स के फिक्शेसन के 31164 प्रकरण प्राप्त हुये। उन्होंने इनका विवरण सदन के पटल पर रखा। 


उन्होंने बताया कि राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996 के नियम 89(3) में दोषी के विरूद्व कार्यवाही किये जाने का प्रावधान है। सेवानिवृत्ति के उपरान्त यदि दो माह पश्चात भी पेंशन स्वीकृत नहीं की जाती है तो विलम्ब की अवधि के लिए 9 प्रतिशत ब्याज की दर से सेवानिवृत्त कर्मचारी को भुगतान किये जाने का प्रावधान है। साथ ही जिस अधिकारी/कर्मचारी का दोष पाया जाता है तो उनके विरूद्व कार्यवाही कर वसूली किये जाने का भी प्रावधान है। यह कार्यवाही सेवानिवृत्त कर्मचारी  के संबंधित प्रशासनिक विभाग के द्वारा की जाती है।
उन्होंने गत तीन वषोर्ं में सेवानिवृत्त अधिकारियों व कर्मचारियों से प्राप्त शिकायतों एवं उन पर की गयी कार्यवाही का जिलेवार विवरण सदन के पटल पर रखा। 

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